महज बीस दिन के बच्चा हुआ बैग से बरामद, रोने से चला पता
गाजियाबाद। जाके राकों साइंया मार सके न कोई वाली ये लाइने एक बार फिर से महानगर गाजियाबाद में सच साबित हुई है। यहां के मुरादनगर गंगनहर इलाके में स्कूल बैग में एक बीस दिन का नौनिहाल बरामद हुआ है। दरअसल किसी शख्स की तरफ से इसे फेंक दिया गया था। वहां आसपास से गुजरने वाले दम्पत्ति ने बच्चे के रोने की आवाज सुनी तो चैक किया कि एक बैग से रोने की आवाज आ रही है। बैग खोलकर देखने पर महज बीस दिन का बच्चा मिला। इसके बाद में इसके बारे में पुलिस को सूचित किया गया। नवजात को अस्पताल में एडमिट कराया गया। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चा पूरी तरीके से स्वस्थ्य है। फिलहाल एक एनजीओ को बच्चे की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है।
बच्चे को समझा गया मृत
पुलिस के सूत्रों के मुताबिक जिन लोगों ने इस बच्चे को यहां पर फेंका होगा उन्होने इसे मृत समझ लिया होगा। इसके अलावा अन्य कई कारण ऐसे है जोकि समाज की सोच को उजागर करते है। बरहाल बच्चे की मां नहीं चाहिती थी कि वो इस दुनिया में आए। अभी तक भी बच्चे के किसी परिजन का पता नहीं लगा है। लगातार इसके लिए कोशिश की जा रही है।
आशा दीप फांउडेशन संभाल रहा जिम्मेदारी
आशा दीप फाउंडेशन की अधिकारी राजबाला ने बताया कि नवजात की जिम्मेदारी हमारी संस्था की है। जब तक इसके माता पिता का पता नहीं चल जाता है इसका ख्याल रखा जाएगा। कुछ महीनों के इंतजार के बाद में अगर कोई इसे गोद लेना चाहेगा तो कागजी कारवाई करने के बाद में उसे सुपुर्द कर दिया जाएगा। शायद इसकी मां ने अपनी गलती छुपाने के लिए इस बच्चे को यहां फेंक दिया होगा ।
पुलिस अधिकारी का कहना
एसपी देहात अरविंद कुमार मौर्य का कहना है कि ठंड के इस मौसम में बच्चा इस बैग में नहर के पास जंगल में पड़ा हुआ था। जिसे एक दंपत्ति द्वारा उठा कर पुलिस को सौंपा गया है जिसके बाद बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया और उसे आशा दीप फाउंडेशन के पास रखा गया है और अब बच्चे की जान बच गई है । राहगीर ने देखा और पुलिस को बताया। पुलिस ने बच्चे को बैग में से निकाल कर एक संस्था के पास रख दिया है। जहां बच्चा स्वस्थ है। तमाम जिलों को बच्चे की तस्वीर भेज दी गई है कि किसी जिले से कोई बच्चा तो किडनैप नहीं हुआ है। सभी एंगल्स के बावजूद अभी तक कुछ निकल कर सामने नहीं आया है।