
गाजियाबाद. डेढ़ महीने से कानपुर में एसपी पूर्वी का पद संभाल रहे यूपी कैडर के 30 वर्ष के आइपीएस सुरेंद्र दास की आत्महत्या से पुलिस विभाग से लेकर उनके परिजन और रिश्तेदार सभी सकते में है। इस आत्म हत्या में सबसे बड़ी बात ये है कि जिस अफसर को एकेडमी में हर हालात से जूझने की कड़ी ट्रेनिंग दी गई थी। वह अपने घरेलू विवाद को भी नहीं सुलझा पाया और इस कलह से टूटकर मौत को गले लगा लिया। पुलिस और परिवार दोनों ने आत्महत्या के पीछे पत्नी से विवाद को मुख्य वजह करार दिया है। सुरेंद्र दास के घर वालों का कहना है कि वे सुसाइड लेटर की एक्सपर्ट से जांच के बाद पत्नी और ससुरालवालों पर केस दर्ज कराएंगे। उनके इस कदम पर परिजनों को विश्वास नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि फौज में कैप्टन रहे पिता की मौत के बाद भी जो सुरेंद्र दास लक्ष्य से नहीं डिगा और आईपीएस बनकर अपने इरादे को सच साबित कर दिखाया, वह सुरेंद्र पत्नी से अनबन के बाद मौत को गले लगा लेंगे। इसका अंदाजा परिवार को भी नहीं था। लेकिन किसी युवा अफसर की खुदकुशी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले बिहार के बक्सर में तैनात जिलाधिकारी मुकेश पांडेय द्वारा गाजियाबाद में चलती ट्रेन के नीचे आकर आत्महत्या करने का मामला प्रकाश में आया था। उनके शव को रेलवे पुलिस ने बरामद किया था। बता दें कि बिहार निवासी मुकेश पांडेय 2012 बैच के IAS अफसर थे। आत्महत्या के पहले मुकेश पांडेय ने एक सुसाइड नोट नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित 7 स्टार होटल लीला के कमरा संख्या 742 में छोड़ा था। इसके बाद उन्होंने अपना मोबाइल जनकपुरी इलाके में छोड़ दिया था।
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पुलिस के आलाधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच से यह पता चला है कि IAS मुकेश पांडेय पहले नई दिल्ली आए थे। जांच से यह बात सामने आई थी कि पाण्डेय का अपने घर वालों से किसी बात को लेकर तनाव चल रहा था। मुकेश पांडेय ने आत्महत्या करने के पहले अपने घर टेलीफोन से एक संदेशा भेजा था। इस संदेश में उन्होंने जिन्दगी से तंग आ जाने और अच्छाई से विश्वास उठ जाने की बात की थी। साथ में यह भी बता दिया था कि वे दिल्ली में आत्महत्या करने जा रहे हैं। संदेश मिलते ही परिवार वाले बेचैन हो गए थे। फिर बिहार से किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दिल्ली पुलिस को संपर्क साधा और मदद करने को कहा।
इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उनके मैसेज के आधार पर कार्रवाई शुरू की। इस संदेशे में यह भी लिखा था कि मैं अपना सुसाइड नोट दिल्ली के होटल लीला पैलेस के रूम नंबर 742 में छोड़ दूंगा। दिल्ली पुलिस लीला पैलेस पहुंची तो कमरे में IAS मुकेश पांडेय का सुसाइड नोट मिल गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस दौड़ी-दौड़ी जनकपुरी में बताए स्थान पर गई, लेकिन यहां किसी के आत्महत्या करने की जानकारी नहीं मिली, हालांकि उनका मोबाइल जरूर प्राप्त हो गया। इसके बाद पुलिस ने आगे की जांच शुरू कर दी। तभी गाजियाबाद रेलवे पुलिस से खबर मिली कि एक व्यक्ति ने ट्रेन से कटकर जान दे दी है। व्यक्ति देखने में अच्छे घर से लग रहा है, लेकिन चेहरा इतना विक्षिप्त है कि पहचान नहीं की जा सकती। इसके बाद दिल्ली पुलिस के अधिकारी भागे-भागे गाजियाबाद पहुंचे तो शव की शिनाख्त IAS मुकेश पांडेय के रूप में ही हुई। यहां भी मुकेश पांडेय ने एक ऐसा तथ्य छोड़ दिया था, जिससे उनकी पहचान हो जाती। शव को देखने से पता चला कि आत्महत्या करने के लिए IAS मुकेश पांडेय ने अपने सिर को पटरी पर रख दिया था।
एक हफ्ते पहले ही हुई थी बक्सर में पदस्थापना
बताते चलें कि मुकेश पांडेय ने जिलाधिकारी के रूप में पहली पदस्थापना पिछले ही हफ्ते बक्सर में प्राप्त की थी। इसके पहले वे बिहार के कटिहार में DDC के पद पर तैनात थे। जानकारी के अनुसार 2012 में मुकेश पांडेय IAS बने थे। उनकी शादी पटना के मौर्या होटल में हुई थी। मुकेश पांडेय के ससुर राकेश कुमार सिंह पटना के जाने-माने कारोबारी हैं। Vau’s ऑटोमोबाइल के नाम से पटना में उनकी मारुति की ऑटोमोबाइल एजेंसी है।
वैवाहिक जीवन से सुखी नहीं थे मुकेश
जानकार कहते हैं कि शादी तो बहुत धूमधाम से हुई थी, लेकिन वैवाहिक जीवन से खुश नहीं था। कुछ ही वर्षों में रिश्तों में बहुत खटास आ गई थी। रिश्ते के बारे में करीब से जानने वाले यह भी कह रहे हैं कि शादी के बाद भी मुकेश की पत्नी बहुत दिनों तक साथ नहीं रही। बेटी की परेशानी को कम करने के लिए राकेश सिंह लंबे अरसे तक बेटी को अपने कारोबार में व्यस्त रखते थे। आत्महत्या करने जाने से पहले घर भेजे गए अंतिम संदेशे से भी स्पष्ट है कि मुकेश अपनी जिंदगी से बहुत परेशान थे। उन्होंने लिखा है कि मैं जिन्दगी से हार गया हूं। जिंदा रहने का कोई औचित्य नहीं रह गया है। इसलिए खुदकुशी करने जा रहा हूं। मेरा सुसाइड नोट दिल्ली के लीला पैलेस होटल में मिलेगा। घरवालों से उन्होंने माफ़ी भी मांगी है और सभी को प्यार भी अपने अंतिम संदेशे में कहा है।