
SP MP Afzal Ansari: बाहुबली मुख्तार अंरी के गैंग पर यूपी पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। दिवंगत मुख्तार के गैंग के सदस्यों और उनके करीबियों को दिए गए हथियार लाइसेंसों की पूरी छानबीन शुरू कर दी गई है। अब तक 51 लाइसेंसों पर खरीदे गए 145 हथियारों का भौतिक सत्यापन चल रहा है। इस जांच में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिसके चलते अफजाल अंसारी समेत तीन लोगों पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
वाराणसी जोन के डीआईजी के निर्देश पर विशेष टीम बनाई गई थी। इस टीम ने सिर्फ उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में ही नहीं, बल्कि दिल्ली, पंजाब और अरुणाचल प्रदेश तक जाकर डीएम कार्यालयों और हथियार दुकानों के रिकॉर्ड चेक किए। जांच के दौरान कई लाइसेंस और हथियार खरीद-बिक्री के कागजात गायब मिले। कुछ हथियारों का पता ही नहीं चल पा रहा है कि वे अब कहां हैं और किसके पास हैं। पुलिस का आरोप है कि पुराने हथियार लिपिकों ने मिलीभगत करके मूल कागजात गायब करवा दिए। इससे हथियारों की ट्रैकिंग और सही इस्तेमाल की जांच में दिक्कत हो रही है।
सबसे बड़ा मामला अफजाल अंसारी का है। उनके नाम पर जारी लाइसेंस नंबर 1188 P-2 की फाइल और खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड गायब पाए गए। इस लाइसेंस पर खरीदी गई राइफल नंबर 830405 की लोकेशन भी साफ नहीं है। इस पूरे मामले में गाजीपुर कोतवाली थाने में मुकदमा नंबर 535/2026 दर्ज किया गया है।
इस केस में अफजाल अंसारी के अलावा तत्कालीन पहले हथियार लिपिक असफाक अहमद और दूसरे लिपिक गौरी शंकर राम पर भी केस दर्ज हुआ है। इन पर आईपीसी की धारा 409, 120-बी और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा चल रहा है। पुलिस ने साफ कहा है कि बाकी लाइसेंसों और हथियारों की जांच अभी जारी है। जहां भी अनियमितता मिलेगी, वहां कार्रवाई होगी।
आपको बता दें कि मुख्तार अंसारी की मौत मार्च 2024 में बांदा जेल में दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। उस वक्त उनके परिवार ने जहर देने का आरोप लगाया था, लेकिन पोस्टमॉर्टम में इसकी पुष्टि नहीं हुई। मुख्तार पर 65 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे, जिनमें 16 हत्या के मामले शामिल थे। इसके अलावा गैंगस्टर, वसूली और अपहरण जैसे गंभीर आरोप भी उन पर लगे रहे। वे पांच बार विधायक रह चुके थे।