103-foot-long concrete bridge was built in Ghazipur using donations.: गाजीपुर में गांव की जनता ने चंदे के पैसे से करीब 103 फीट लंबा पक्का पुल बना दिया। जो सेना के रिटायर्ड कैप्टन और रिटायर्ड इंजीनियरिंग कोर के विशेषज्ञ की देखरेख में तैयार हुआ है।
Ghazipur, villagers collected donations and built a 103-foot-long concrete bridge: गाजीपुर के कासिमाबाद नोनहरा के क्यामपुर छावनी गांव के पास मगई नदी स्थित है। जिस पर लकड़ी के छोटे से पुल से गांव वालों का आना-जाना होता था। बरसात के दिनों में यह पल भी बह जाता था जिससे ग्रामीणों के साथ स्कूली छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी होती थी। स्थानीय लोगों में जनप्रतिनिधियों से पुल की मांग की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी बीच सेना से रिटायर्ड कैप्टन रविंद्र यादव ने जनवरी 2024 में पुल की नींव रखी और आज पुल शान से खड़ा है।
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में जन सहयोग का बेहतरीन नमूना देखने को मिला है जब ग्रामीणों ने करोड़ों रुपए चंदा इकट्ठा कर पक्के पुल का निर्माण कर दिया। जिसका शिलान्यास 24-25 फरवरी 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश शेखर कुमार यादव ने किया। इस मौके पर भूमि पूजन भी हुआ। सेना के रिटायर्ड कैपिटल रविंद्र यादव के प्रयास ने रंग लाया। पुल निर्माण में उन्होंने 10 लाख रुपए की मदद दी।
दूसरी तरफ ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा किया और पुल बनना शुरू हो गया। ग्रामीणों ने एक करोड़ 50 लाख रुपए से दो पिलर और स्लैब डाल दिया। सेना के रिटायर्ड इंजीनियरिंग कोर के विशेषज्ञों की देखरेख में पुल बनकर तैयार हुआ। जिसमें गांव के लोग और छात्रों ने श्रमदान किया। करीब 103 फीट लंबा पक्का पुल बनकर तैयार है। जो तकनीक का बेजोड़ उदाहरण है।
इस पुल के बन जाने से कादीपुर, उसरी, भोपतपूर, वासुदेवपुर, अरजानीपुर, अरार, परसुपुर , बलुआ, मौलना पुर करीब सहित करीब 50 गांव के लोगों को पुल का लाभ मिलेगा। जिसका उद्घाटन 13 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति शेखर सिंह यादव ने किया इस मौके पर उन्होंने कहा था कि जो काम जनप्रतिनिधियों को करना था उसे जनता खुद कर रही है।
जिला प्रशासन ने 23 जून 2025 को पुल का निर्माण कार्य रुकवा दिया था। जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दौरे पर आए थे। लेकिन फिर काम दोबारा शुरू हुआ। आज पुल शान से खड़ा है जनप्रतिनिधियों और सरकारी व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहा है।