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पापा आएंगे खिलौना लाएंगे,इंतजार करती रह गईं मासूम बेटियां, कांपते हाथों से पिता ने दी बेटे को मुखाग्नि, रो पड़ा पूरा गांव

Ghazipur train murder case: गाजीपुर में ट्रेन में गोली मारकर हत्या किए गए मंगरू चौधरी का शव घर पहुंचते ही पूरे गांव में मातम छा गया। पिता के इंतजार में बैठीं मासूम बेटियां खिलौनों की आस लगाए रहीं। जबकि बूढ़े पिता ने कांपते हाथों से बेटे को मुखाग्नि दी। पत्नी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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मृतक की फाइल फोटो सांकेतिक तस्वीर फोटो जेनरेट AI

मृतक की फाइल फोटो सांकेतिक तस्वीर फोटो जेनरेट AI

गाजीपुर के चौधरी मोहल्ले में उस समय मातम छा गया। जब चेन्नई से लौट रहे मंगरू चौधरी का शव घर पहुंचा। परिवार की आर्थिक हालत सुधारने के लिए वह कमाने गया था। लेकिन ट्रेन में गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई। पिता के इंतजार में बैठी दोनों मासूम बेटियां यह समझ ही नहीं पाईं कि अब उनके पापा कभी वापस लौट कर नहीं आएंगे। सोमवार शाम पिता ने कांपते हाथों से बेटे को मुखाग्नि दी।

गाजीपुर जिले के जमानिया नगर स्थित चौधरी मोहल्ला सोमवार को दर्द और चीख-पुकार से भर गया। यहां रहने वाले मंगरू चौधरी का शव जैसे ही घर पहुंचा। पूरे मोहल्ले की आंखें नम हो गईं। परिवार की हालत सुधारने और बेटियों का भविष्य संवारने का सपना लेकर वह कुछ दिन पहले चेन्नई कमाने गया था। लेकिन घर उसकी लाश पहुंची। बताया जा रहा है कि मंगरू चौधरी 26 अप्रैल को चेन्नई मछली पालन का काम के लिए गया था। वहां काम पसंद न आने पर उसने वापस घर लौटने का फैसला किया। आठ मई को वह ट्रेन से जमानिया के लिए रवाना हुआ था। इसी दौरान ट्रेन में बदमाशों ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी।

पापा का इंतजार करती रही मासूम बेटियां, पत्नी की चीख सुनकर हर आंखें हुई नम

घर पर उसकी पत्नी सोनी और पांच साल की बेटी अनुशिका के साथ दो साल की अन्नू बेसब्री से इंतजार कर रही थीं। दोनों बच्चियां बार-बार मां से पूछ रही थीं कि पापा कब आएंगे। और उनके लिए क्या लाएंगे। उन्हें क्या पता था कि इस बार पिता खिलौने नहीं, बल्कि कफन में लिपट कर आएंगे। सोमवार शाम पोस्टमार्टम के बाद मंगरू का शव घर पहुंचा तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पत्नी सोनी पति के शव से लिपटकर बार-बार बेहोश हो रही थी। उसकी चीखें सुनकर आसपास मौजूद लोग भी खुद को संभाल नहीं सके।

कांपते हाथों से बूढ़े पिता ने जवान बेटे को दिया मुखाग्नि

शाम करीब पांच बजे नगर के बलुआ घाट पर मंगरू का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सबसे दर्दनाक पल तब आया। जब बूढ़े पिता दूधनाथ चौधरी ने कांपते हाथों से अपने जवान बेटे की चिता को मुखाग्नि दी। घाट पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। बड़े भाई अर्जुन चौधरी भी छोटे भाई को याद कर फूट-फूटकर रो पड़े। पति की मौत के बाद पत्नी सोनी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वह बार-बार यही कह रही है कि अब वह अपनी दोनों मासूम बेटियों का पालन-पोषण कैसे करेगी।