
Delhi Rouse Avenue Court: महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व WFI चीफ बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को उन्हें बरी कर दिया। कोर्ट की सुनवाई शुरू होने पर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) अश्विनी पंवार ने बृजभूषण शरण सिंह को बरी करने का फैसला सुनाया। कोर्ट ने सह-आरोपी और पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार ने 2 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार, 3 अगस्त को अदालत ने यह फैसला इन-कैमरा सुनवाई के दौरान सुनाया। सुनवाई में महिला पहलवानों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन, जबकि बृजभूषण की ओर से अधिवक्ता राजीव मोहन ने पक्ष रखा।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर महिला पहलवानों के प्रदर्शन के बाद यह मामला चर्चा में आया था। जनवरी 2023 में नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया और विनेश फोगाट समेत कई पहलवानों ने पूर्व WFI अध्यक्ष और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न और पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए थे।
महिला पहलवानों की शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, जिसमें बृजभूषण शरण सिंह के साथ WFI के तत्कालीन सहायक सचिव विनोद तोमर को भी आरोपी बनाया गया।
जून 2023 में पुलिस ने जांच पूरी कर बृजभूषण के खिलाफ विभिन्न धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद मई 2024 में ट्रायल कोर्ट ने पांच महिला पहलवानों से जुड़े मामले में उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप तय किए और मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई।
मामले में एक नाबालिग पहलवान ने भी आरोप लगाए थे, लेकिन बाद में उसने अपना बयान वापस ले लिया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की, जिसे स्वीकार किए जाने के बाद वह मामला बंद हो गया। मुकदमे के दौरान विशेष जांच दल (SIT) के एक सदस्य और जांच अधिकारी के बयान भी अदालत में दर्ज किए गए थे। करीब तीन साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद सोमवार को अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को इस मामले में बरी कर दिया।
अदालत के आदेश के बाद पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि 18 जनवरी 2023 को मैंने कहा था कि ये एक षडयंत्र है। अगर मेरे ऊपर कोई आरोप सही पाया जाएगा तो मैं स्वत: फांसी पर लटक जाऊंगा। आज तक मैं उसी बात पर कायम रहा और आज लगभग 3 साल बाद कोर्ट ने मुझे और विनोद तोमर का बरी किया है। मैं 15-16 साल की उम्र से संघर्ष देख रहा हूं। मैं हमेशा जो कमजोर थे, जिनका हक मारा जाता था मैं उनके पक्ष में खड़ा होता था। मुझे अपने आप पर विश्वास था…मुझे पूरा विश्वास था कि मेरे साथ न्याय होगा। मेरे साथ न्याय हुआ। मैंने अपने आप को कभी अपराधी महसूस नहीं किया।