
महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व WFI चीफ बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को उन्हें बरी कर दिया। कोर्ट ने सह-आरोपी और पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार, 3 अगस्त को अदालत ने यह फैसला इन-कैमरा सुनवाई के दौरान सुनाया। सुनवाई में महिला पहलवानों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन, जबकि बृजभूषण की ओर से अधिवक्ता राजीव मोहन ने पक्ष रखा।
मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर महिला पहलवानों के प्रदर्शन के बाद दर्ज एफआईआर से जुड़ा था। आरोप था कि बृजभूषण शरण सिंह ने WFI अध्यक्ष रहते हुए भारत और विदेश की कई महिला पहलवानों का यौन उत्पीड़न किया। दिल्ली पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद 15 जून 2023 को करीब 1,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354, 354A, 354D और 506(1) के तहत आरोप लगाए गए थे। मुकदमे के दौरान विशेष जांच दल (SIT) के एक सदस्य और जांच अधिकारी के बयान भी अदालत में दर्ज किए गए थे। करीब तीन साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद सोमवार को अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को इस मामले में बरी कर दिया।
अदालत के आदेश के बाद पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने शुरुआत में जो कहा था, आज वही बात सच साबित हुई है। वहीं उनके वकील ने बताया कि वे अदालत के विस्तृत आदेश का इंतजार कर रहे हैं। वकील के मुताबिक, शिकायतकर्ता के बयानों और शुरुआती शिकायतों में कई विरोधाभास और विसंगतियां मौजूद थीं। कोर्ट का विस्तृत आदेश जारी होने के बाद ही आगे की कानूनी स्थिति पर विस्तार से बात की जाएगी।
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