UGC कानून पर बृजभूषण सिंह का तीखा हमला—कहा, सरकार ने कानून बनाकर समाज में भ्रम और टकराव पैदा कर दिया। सवाल उठाया कि क्या यह नियम सामाजिक सौहार्द तोड़ने की दिशा में ले जाएगा?
बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने कहा कि आज कई दिनों से यूजीसी पर एक विवाद हो रहा है। सरकार ने पढ़ने वाले बच्चों के बीच में कभी-कभी सबर्ण बच्चों के द्वारा कोई घटना घट जाती है। उसको लेकर सरकार दलित और ओबीसी के लिए एक कानून लेकर आई है। जिसके कारण बहुत भ्रामक स्थिति हो गई है।
आज पूरे देश में विरोध हो रहा है। सामने खड़े करीब दो दर्जन बच्चों की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसमें दलित सामान्य और ओबीसी के बच्चे हैं। यह सभी बच्चे रोज एक साथ खेलते हैं। उन्होंने बच्चों से सवाल किया कि कितने साल से एक साथ खेल रहे हो तो बच्चों का जवाब था कि चार-पांच साल से हम लोग एक साथ खेल रहे हैं। सभी बच्चे जो घर से लाते हैं। एक साथ बैठकर नाश्ता करते हैं। यह लोग यह काम कोई कानून के तहत नहीं कर रहे हैं। यह कानून की बंदिश से नहीं खेल रहे हैं। यह हमारी सनातन की परंपरा रही है। यह हमारे रग रग में है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था। जो नीचे हैं उन्हें ऊपर लाना है उनके साथ भेदभाव न करना यही हमारी श्रवण की परंपरा है। उन्होंने कहा कि मैं सरकार से कहना चाहता हूं कि समाज कैसे चलता है। ऑफिस में बैठकर समाज को नहीं चलाया जा सकता है। समाज कैसे चलता है। यह जानना है तो गांव में आइये। और देखिए की गांव में बिना किसी भेदभाव के सभी बच्चे एक साथ खेलते हैं। कोई बच्चा किसी से जटिल नहीं पूछता है। क्या आप चाहते हैं कि भविष्य में किसी घर में एंट्री ओबीसी को न दी जाए। क्या आप चाहते हैं? कि इस घर में दलित को एंट्री ना दी जाए। ऐसा आप माहौल खड़ा कर रहे हैं। आपसे हाथ जोड़कर विनती है कि यह कानून वापस लिया जाए।
उन्होंने कहा कि मैं सबर्ण समाज से अपील करना चाहता हूं। आप दलित समाज और ओबीसी समाज के समझदार लोगों से संपर्क करें। उनसे इसका विरोध करना है। क्योंकि गांव में हम एक साथ रहते हैं। गांव में शादी विवाह मांगलिक कार्यक्रम होते हैं। हर में उनका नेग होता है।
बृजभूषण सिंह ने कहां कि 1 जनवरी से 8 जनवरी तक हमने सनातन कथा कराया। हमने 52 जाति के धर्म गुरुओं से इसका उद्घाटन कराया। उपहार में एक-एक वृक्ष लिया। और मैं सनातन वाटिका बनाने जा रहा हूं। आपने तो कानून बनाकर हमारे उस मिशन को स्वाहा कर दिया। आइये हम आपको दिखाते हैं कि कौन सा ऐसा समाज है। जिसने कथा में भागीदारी और सहयोग नहीं किया है। यह कोई नई परंपरा नहीं रही है। यह हमारी सनातन परंपरा है। इसमें कानून की कोई जरूरत नहीं है। हां यदि कोई बच्चा गलती करता है। जो क्षमा करने योग्य नहीं है। उसको आप सजा दीजिए। ऐसी घटनाएं यदा-कदा होती हैं। यह जो कानून है। यह समाज में टकराव पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि मेरे ऊपर दबाव पड़ रहा था बोलो- बोलो? हमने कहा था हम गांव में जाकर बोलेंगे।