
Gonda Flood: नेपाल के पहाड़ों पर हो रही बारिश और बैराजों से छोड़े गए पानी के कारण गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बुधवार सुबह केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार नदी खतरे के निशान से 39 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। बाढ़ से कर्नलगंज और तरबगंज तहसील क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांव प्रभावित हैं। ऐली परसौली इलाके में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। करीब 20 हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित बताई जा रही है। कई परिवार सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए हैं।
गोंडा में घाघरा नदी ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में बारिश के साथ बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने के बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। बुधवार सुबह केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक घाघरा खतरे के निशान से 39 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। बुधवार को गिरजा बैराज से 18,37,38 क्यूसेक, शारदा बैराज से 14,98,78 क्यूसेक और सरयू बैराज से 250 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे घाघरा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। नदी के किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
गोंडा के कर्नलगंज और तरबगंज क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। बेलसर विकासखंड की ग्राम पंचायत ऐली परसौली और आसपास के मजरे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कई जगह गलियों और रास्तों पर तीन से चार फीट तक पानी भर गया है। पानी घरों के अंदर तक पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में परिवार अपना घर छोड़कर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। कई परिवार चारपाइयों को ऊंचा करके घर में ही रात गुजारने को मजबूर हैं। वहीं फूस के मकानों में रहने वाले परिवारों के सामने सबसे ज्यादा परेशानी है।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार बाढ़ से करीब 20 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। खेतों में खड़ी सैकड़ों बीघा फसल पानी में डूब गई है। किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
बाढ़ का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा है। ऐली परसौली क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय गोड़ियाना भी पानी में डूब गया है। जलभराव के कारण स्कूल में पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
हालात को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड में है।
डीएम प्रियंका निरंजन के निर्देश पर तहसील प्रशासन की टीमें प्रभावित गांवों में लगातार पहुंच रही हैं। राजस्व निरीक्षक और लेखपाल ग्रामीणों से संपर्क कर उनकी समस्याओं की जानकारी ले रहे हैं। बाढ़ पीड़ित परिवारों को लंच पैकेट और जरूरी राहत सामग्री दी जा रही है। प्रशासन ने भरोसा दिया है कि जलभराव खत्म होने तक प्रभावित लोगों को जरूरत के अनुसार भोजन और अन्य सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
आवागमन के लिए प्रभावित इलाकों में नावों की व्यवस्था की गई है। बाढ़ चौकियां भी सक्रिय कर दी गई हैं। स्वास्थ्य और राजस्व विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। डीएम और सीडीओ ने बाढ़ प्रभावित लोगों से संवाद कर उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है। फिलहाल घाघरा के बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन की नजर नदी के जलस्तर और प्रभावित गांवों की स्थिति पर बनी हुई है।