
कब्र की खुदाई करते परिजन जुटे ग्रामीण
Gonda News: गोंडा जिले के छपिया में पांच साल के बच्चे की मौत के बाद ऐसी घटना सामने आई। जिसने पूरे इलाके को हैरान कर दिया। अंतिम संस्कार हो चुका था। लेकिन एक तांत्रिक ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि तंत्र-मंत्र और जड़ी-बूटी से बच्चा दोबारा जिंदा हो सकता है। इसके बाद बच्चे के शव को मिट्टी से बाहर निकाला गया। परिजन घंटों उम्मीद लगाए बैठे रहे। लेकिन शरीर में कोई हलचल नहीं हुई। दावा पूरी तरह विफल हो गया।
गोंडा जिले के छपिया थाना क्षेत्र के आज्ञामाफी गांव में पांच वर्षीय सत्यम की मौत के बाद अंधविश्वास से जुड़ा हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बच्चे की मौत के बाद परिवार ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। लेकिन इसके बाद खलीलाबाद से आए एक कथित तांत्रिक ने परिजनों को यकीन दिलाया कि वह तंत्र-मंत्र और जड़ी-बूटियों की मदद से बच्चे को फिर से जीवित कर सकता है।
तांत्रिक की बात पर परिजन एक बार फिर उम्मीद में आ गए। अंतिम संस्कार के बाद बच्चे के शव को मिट्टी से बाहर निकाला गया। इसके बाद तांत्रिक की ओर से दी गई जड़ी-बूटी की दवा बच्चे को पिलाने का प्रयास किया गया। परिवार के लोग काफी देर तक बच्चे के शरीर में हलचल होने का इंतजार करते रहे। समय बीतता गया। लेकिन बच्चे के शरीर में जीवन का कोई संकेत नहीं मिला। आखिरकार यह उम्मीद भी टूट गई कि बच्चा दोबारा जीवित हो सकता है। घटना के बाद इलाके में तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक के नाम पर किए जाने वाले ऐसे दावों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
दरअसल, आज्ञामाफी गांव की रहने वाले जय प्रकाश का पांच वर्षीय बेटा सत्यम 14 अगस्त को कुछ बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छपिया लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने इलाज शुरू किया। लेकिन उपचार के दौरान ही बच्चे की मौत हो गई। बताया जाता है कि उसी शाम मखौड़ा धाम में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया था।
बच्चे की मौत से परिवार पहले ही सदमे में था। ऐसे में तांत्रिक के दावे ने परिजनों को दोबारा उम्मीद में ला दिया। हालांकि चिकित्सकीय तौर पर मृत्यु के बाद किसी व्यक्ति को तंत्र-मंत्र, झाड़-फूंक या जड़ी-बूटी से जीवित करने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। सीएचसी छपिया के अधीक्षक डॉ. अमित कुमार ने बताया कि बालक की मौत उपचार के दौरान हुई थी। वहीं छपिया थानाध्यक्ष प्रबोध कुमार ने कहा कि मामले में थाने पर फिलहाल कोई सूचना नहीं दी गई है।
यह घटना ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता की जरूरत को भी सामने लाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी या आपात स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय तत्काल योग्य चिकित्सक और अस्पताल की मदद लेनी चाहिए।
Updated on:
16 Aug 2026 08:44 pm
Published on:
16 Aug 2026 08:44 pm
