
Gonda News: गांवों में जमीन, रास्ते, नाली और बंटवारे जैसे छोटे विवाद अक्सर लंबे समय तक मुकदमेबाजी का कारण बन जाते हैं। अब ऐसे मामलों को गांव में ही बातचीत और आपसी सहमति से सुलझाने की पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में चल रहे ‘वाद-मुक्त देवीपाटन: संवाद से समाधान’ अभियान के तहत मंडल के 500 चयनित गांवों में से 330 को वाद-मुक्त घोषित किया जा चुका है।
देवीपाटन मंडल में ग्रामीण विवादों को लेकर प्रशासन की ओर से शुरू किया गया ‘वाद-मुक्त देवीपाटन: संवाद से समाधान’ अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। अभियान का मकसद ग्रामीण इलाकों में होने वाले सिविल, राजस्व और सामुदायिक विवादों को कोर्ट-कचहरी तक पहुंचने से पहले गांव स्तर पर बातचीत और मध्यस्थता के जरिए सुलझाना है। अब तक मंडल के 500 चयनित गांवों में से 330 गांवों को वाद-मुक्त घोषित किया जा चुका है।
मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल के निर्देशन में यह अभियान गोण्डा, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती की 16 तहसीलों में चलाया जा रहा है। इसके तहत अब तक 769 विवाद सामने आए हैं, जिनका सामुदायिक मध्यस्थता और आपसी सहमति के आधार पर समाधान कराया जा रहा है।
अभियान के तहत प्रत्येक चयनित गांव में पांच सदस्यीय सामुदायिक मध्यस्थता पैनल बनाया गया है। इसमें लेखपाल, पंचायत सचिव, ग्राम प्रधान, महिला प्रतिनिधि और गांव के वरिष्ठ सदस्य को शामिल किया गया है। गांव के पंचायत भवन या किसी सार्वजनिक स्थल पर मध्यस्थता केंद्र बनाया गया है। पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए नायब तहसीलदार या तहसीलदार को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।
आंकड़ों के मुताबिक, बहराइच में सबसे अधिक 109 गांवों को वाद-मुक्त घोषित किया गया है। यहां 141 विवाद प्राप्त हुए हैं। बलरामपुर में 86 गांव वाद-मुक्त हुए और 237 विवाद सामने आए। गोण्डा में 82 गांव वाद-मुक्त घोषित किए गए तथा 167 विवाद प्राप्त हुए हैं। वहीं श्रावस्ती में 53 गांव वाद-मुक्त हुए हैं। 224 विवादों के समाधान की प्रक्रिया चल रही है।
मध्यस्थता के दौरान मुख्य रूप से चकमार्ग, आबादी के रास्ते, नाली, जमीन के बंटवारे, वरासत और खेतों की सीमा से जुड़े विवादों को सुलझाया जा रहा है। इसके लिए गांवों में बैठकें आयोजित करने के साथ मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण और अभिलेखों का सत्यापन भी किया जा रहा है।
प्रशासन का लक्ष्य चयनित सभी गांवों में विवादों के समाधान की प्रक्रिया पूरी कर पूरे देवीपाटन मंडल को वाद-मुक्त मंडल के रूप में स्थापित करना है। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से ग्रामीणों का समय और पैसा बचने के साथ आपसी सौहार्द और विश्वास भी मजबूत होगा।