
Gonda Fraud Case: गोंडा में पूजा-पाठ और तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को ठगने वाले एक बड़े गिरोह का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मनकापुर पुलिस और एसओजी टीम ने गिरोह के सरगना शफीक अली उर्फ ‘बड़े पुजारी’ को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 26.95 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। आरोपी लोगों को धार्मिक अनुष्ठान का झांसा देकर उनके घरों से जेवरात और नकदी गायब कर देता था।
गोंडा जिले में पूजा-पाठ और तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को ठगने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मनकापुर पुलिस और एसओजी की संयुक्त कार्रवाई में मेरठ के रहने वाले शफीक अली उर्फ बड़े पुजारी को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से 26 लाख 95 हजार रुपये नकद बरामद हुए हैं।
पुलिस के अनुसार, आरोपी पर गोंडा और बहराइच में दर्ज कई धोखाधड़ी के मामलों में शामिल होने का आरोप है। यह गिरोह खुद को ज्योतिषाचार्य और तांत्रिक बताकर लोगों की पारिवारिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान करने का दावा करता था। इसके लिए समाचार पत्रों के विज्ञापन तथा साथ पर्चे बांटे जाते थे। लोगों को विशेष पूजा-अनुष्ठान का झांसा दिया जाता था।
मामले का खुलासा तब हुआ जब मनकापुर के आजाद नगर के रहने वाले सुशील सोनी ने पुलिस को शिकायत दी। उन्होंने बताया कि पर्चे में दिए गए नंबर पर संपर्क करने के बाद कथित बाबा उनके घर पहुंचे। गृह दोष दूर करने के नाम पर 65 दिनों तक विशेष पूजा कराने की बात कही। पूजा के दौरान परिवार के सोने-चांदी के आभूषण एक स्टील के डिब्बे में रखवाकर कमरे में अनुष्ठान शुरू कराया गया। परिवार को कमरे का ताला न खोलने की हिदायत दी गई।
कुछ दिनों बाद बाबा ने अपनी मां के निधन का बहाना बनाकर आना बंद कर दिया। लंबे समय तक संपर्क न होने पर जब परिवार ने कमरे का ताला खोला तो वहां से सभी जेवरात और अन्य कीमती सामान गायब मिले। शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और पहले ही पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में आभूषण, नकदी और घटना में प्रयुक्त कार बरामद कर चुकी थी।
पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी ने बताया कि गिरोह के सदस्य पूजा के दौरान पहले से छिपाकर रखा गया सांप निकालकर परिवार वालों को डराते थे। जब लोग पूजा स्थल से दूर हो जाते थे। तब आरोपी डिब्बों और कलशों में रखे जेवरात व नकदी निकाल लेते थे। इसके बाद परिवार को कई दिनों तक डिब्बा न खोलने की सलाह देकर फरार हो जाते थे।
आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि ठगी से हासिल सोने-चांदी के आभूषण नेपाल में बेच दिए जाते थे। उससे मिली रकम का इस्तेमाल निजी खर्चों में किया जाता था। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी है।