
Gonda News: गोंडा के एक सरकारी स्कूल में कक्षा 6, 7 और 8 के बच्चों ने मिलकर ऐसा काम किया है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। बच्चों ने अपना हिंदी बाल अखबार ‘दुलरुआ’ शुरू किया है। इसमें बच्चे खुद खबरें लिखते हैं, उन्हें संपादित करते हैं और अखबार को सजाते हैं। इसके पहले अंक का लोकार्पण यूनिसेफ की शिक्षा अधिकारी तृप्ति कौर और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह ने किया।
गोंडा जिले के शिक्षाक्षेत्र झंझरी में बहराइच रोड स्थित कंपोजिट विद्यालय इमरती विसेन के बच्चों ने पढ़ाई के साथ एक नई पहल की है। यहां कक्षा 6, 7 और 8 के विद्यार्थियों ने मिलकर हिंदी का मासिक बाल अखबार ‘दुलरुआ’ शुरू किया है। इस अखबार की खास बात यह है कि इसे तैयार करने से लेकर खबरें लिखने और संपादन करने तक का काम बच्चे खुद कर रहे हैं।
‘दुलरुआ’ बाल अखबार के पहले अंक का लोकार्पण यूनिसेफ की उत्तर प्रदेश की शिक्षा अधिकारी तृप्ति कौर और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से किया। दोनों अधिकारियों ने बच्चों की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयासों से बच्चों में रचनात्मकता बढ़ती है। साथ ही उनका सामाजिक व्यक्तित्व भी विकसित होता है। बच्चों को अपनी बात कहने और आसपास की घटनाओं को समझने का अवसर मिलता है।
बाल अखबार ‘दुलरुआ’ का पहला अंक बालिका शिक्षा पर केंद्रित है। इसमें किशोरियों और युवतियों के प्रेरणादायक कामों और उपलब्धियों से जुड़ी खबरों की कतरनें लगाई गई हैं। इसके जरिए बच्चों ने बालिका शिक्षा के महत्व को सामने रखने की कोशिश की है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक रघुनाथ पाण्डेय ने बताया कि इस अखबार की शुरुआत विद्यालय की बाल सरकार और मीना मंच के संयुक्त प्रयास से हुई है। इसे हर महीने के अंतिम सप्ताह में नियमित रूप से प्रकाशित किया जाएगा।
इस अखबार को तैयार करने में विद्यालय के सभी छात्र-छात्राएं हिस्सा लेते हैं। बच्चे संवाददाता की भूमिका निभाते हैं। वे अपने अनुभवों और आसपास होने वाली घटनाओं को समाचार के रूप में लिखते हैं। इसके बाद संपादक मंडल के सदस्य खबरों को संपादित करते हैं और उन्हें चार्ट पर सजाकर अखबार का रूप देते हैं। संपादक मंडल में कक्षा 8 की गोल्डी और कक्षा 6 की अनम, नगमा, महक और वर्षा सिंह शामिल हैं। ये सभी मिलकर अखबार को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
‘दुलरुआ’ के माध्यम से बच्चे केवल खबरें लिखना ही नहीं सीख रहे, बल्कि अपने आसपास की घटनाओं को ध्यान से देखना, जरूरी जानकारी जुटाना और उसे दूसरों तक पहुंचाना भी सीख रहे हैं। इससे उनकी लेखन क्षमता और अपनी बात रखने का आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिल सकती है। विद्यालय की यह पहल बच्चों को पढ़ाई के साथ कुछ नया सीखने का अवसर दे रही है। हर महीने प्रकाशित होने वाले इस अखबार के जरिए बच्चे अपनी रचनात्मकता दिखा सकेंगे और स्थानीय घटनाओं को भी जगह दे सकेंगे।