गोंडा

International yoga day 2024: यूपी के इस जिले में जन्मे महर्षि पतंजलि जिनकी विद्या का पूरी दुनिया में बज रहा डंका

International yoga day 2024: उत्तर प्रदेश इस जिले में योग के जन्मदाता महर्षि पतंजलि (Maharishi Patanjali) का जन्म हुआ था। महर्षि पतंजलि शेषनाग के अवतार थे। पर्दे के पीछे से अपने शिष्यों को योग की शिक्षा देते थे।

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Jun 20, 2024
महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली

International yoga day 2024: योग एक ऐसी विधा है। जिसका आज पूरी दुनिया में डंका बज रहा है। आज सभी जाति और धर्म के लोग इसका हिस्सा बन चुके हैं। योग के जनक महर्षि पतंजलि का जन्म गोंडा जिले के वजीरगंज कस्बा से थोड़ी दूर स्थित कोडर झील के पास हुआ था। महर्षि पतंजलि को नाग से बालक के रूप में प्रकट होने पर शेषनाग का अवतार भी माना जाता है।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के वजीरगंज कस्बा स्थित कोडर झील के पास महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली है। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार योग के जनक महर्षि पतंजलि पर्दे के पीछे से यहां पर अपने शिष्यों को शिक्षा देते थे। ऋषि पतंजलि की माता का नाम गोणिका था। इनके पिता के विषय में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। पतंजलि के जन्म के विषय में ऐसा कहा जाता है कि यह स्वयं अपनी माता के अंजुली के जल के सहारे धरती पर नाग से बालक के रूप में प्रकट हुए थे। माता गोणिका के अंजुली से पतन होने के कारण उन्होंने इनका नाम पतंजलि रखा। ऋषि को नाग से बालक होने के कारण शेषनाग का अवतार माना जाता है।

गोण्डा के कोडर गांव में जन्मे थे योग के जनक

महर्षि पतंजलि सिर्फ सनातन धर्म ही नहीं आज हर धर्मो के लिए पूज्य हैं। जिनके बताए योग के सूत्र से आज कितने लोगों ने असाध्य रोगों से मुक्ति पा ली है। जिस अमृत को देवताओं ने अपने पास सम्भाल के रखा उस अमृत स्वरूपी योग को पूरी दुनिया में बांटने वाले महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली जनपद के वजीरगंज विकासखंड के कोडर गांव में स्थित है। महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली का साक्ष्य धर्मग्रंथों में भी मौजूद है। इस बात का प्रमाण पाणिनि की अष्टाध्यायी महाभाष्य में मिलता है। जिसमें पतंजलि को गोनर्दीय कहा गया है। जिसका अर्थ है गोनर्द का रहने वाला। और गोण्डा जिला गोनर्द का ही अपभ्रंश है। महर्षि पतंजलि का जन्मकाल शुंगवंश के शासनकाल का माना जाता है। जो ईसा से 200 वर्ष पूर्व था। महर्षि पतंजलि योगसूत्र के रचनाकार है। इसी रचना से विश्व को योग के महत्व की जानकारियां प्राप्त हुई। ये महर्षि पाणीनी के शिष्य थे।

क्यों सर्पाकार कोडर झील का आकार

महर्षि पतंजलि अपने आश्रम पर अपने शिष्यों को पर्दे के पीछे से शिक्षा दे रहे थे। किसी ने ऋषि का मुख नहीं देखा था। लेकिन एक शिष्य ने पर्दा हटा कर उन्हें देखना चाहा तो वह सर्पाकार रूप में गायब हो गये। लोगों का मत है की वह कोडर झील होते हुए विलुप्त हुए। यही कारण है कि आज भी झील का आकार सर्पाकार है।

महर्षि पतंजलि के तीन प्रमुख कार्य

महर्षि पतंजलि अपने तीन प्रमुख कार्यो के लिए आज भी विख्यात हैं। व्याकरण की पुस्तक महाभाष्य, पाणिनि अष्टाध्यायी व योगशास्त्र कहा जाता है कि महर्षि पतंजलि ने महाभाष्य की रचना का काशी में नागकुआँ नामक स्थान पर इस ग्रंथ की रचना की थी। आज भी नागपंचमी के दिन इस कुंए के पास अनेक विद्वान और विद्यार्थी एकत्र होकर संस्कृत व्याकरण के संबंध में शास्त्रार्थ करते हैं। महाभाष्य व्याकरण का ग्रंथ है। परंतु इसमें साहित्य धर्म भूगोल समाज रहन सहन से संबंधित तथ्य मिलते है। बताया जाता है सवा दो बीघा जमीन मंदिर के नाम पर है। यहाँ के पुजारी रमेश दास इस मंदिर की देख रेख व पूजा पाठ करते हैं।

Published on:
20 Jun 2024 09:03 pm
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