गोंडा

पत्रिका पड़ताल : यहां मची है रेल संपत्तियों की लूट, रक्षक ही बने भक्षक

रेल सम्पत्तियों की लूट मची है। जो रक्षक हैं, वही भक्षक बने हुए हैं, करोड़ों की सम्पत्ति का कोई ब्योरा ढूंढे़ नहीं मिल रहा है...
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Updated: 18 Nov 2017, 7:35 AM IST
Eastern Railway Gonda

कैलाशनाथ वर्मा
गोण्डा. पूर्वोत्तर रेलवे गोण्डा में रेल सम्पत्तियों की लूट मची है। जो रक्षक हैं, वही भक्षक बने हुए हैं। करोड़ों की सम्पत्ति का कोई ब्योरा ढूंढे़ नहीं मिल रहा है।

गोण्डा मुख्यालय पर चाहे आईडब्ल्यू विभाग हो या फिर इन्जीनियरिंग विभाग, यहां के अधिकारी विभाग में अपना सिक्का चला रहे हैं। सीनियर सेक्शन इन्जीनियर कार्यालय में 28 वर्ष एक अधिकारी एक ही स्थान पर तैनात हैं तो पीडब्ल्यूआई विभाग में एक अधिकारी पिछले एक दशक से अधिक से तैनात हैं, जिनके संरक्षण में करोड़ों रुपयों की रेल सम्पत्ति का कोई अता-पता नहीं है। हम बात करते हैं सीनियर सेक्शन इन्जीनियर कार्यालय से सम्बन्धित कार्यों का, तो इस विभाग का कार्य निर्माण से होता है। यदि कार्य ठेके पर भी होता है तो यहां के अधिकारी कार्य के गुणवत्ता की निगरानी करें, रेल सम्पत्तियों पर कोई अतिक्रमण न हो यदि होता है तो रेल सुरक्षा बल का सहयोग लेकर उसे खाली कराये, लेकिन विभाग ऐसे अवैध अतिक्रमणकारियों से माहवारी पैसा वसूल करता है।

यक्ष प्रश्न बना रेलवे आवास
रेलवे विभाग के लिए सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न है, रेल विभाग के तीन आवास, उसके मलबे और उक्त आवासों की भूमि का। एक दशक पूर्व जिले में चक्रवात आने पर बड़गांव रेल मस्जिद का निर्माणाधीन आवास तीन रेल आवासों के ब्लाक पर गिरने से आवास क्षतिग्रस्त हो गये थे। उस समय उक्त आवास में रेल कर्मी निवास भी कर रहे थे, लेकिन उन्हें कोई क्षति नहीं हुयी थी। काफी दिन तक आवास क्षतिग्रस्त हालत में मौजूद थे, लेकिन कुछ दिनों के बाद तीनों आवासों में लगे रेल के गाटर रेल लाइन जिसकी कीमत लाखों में बतायी गयी है। एक-एक कर गायब कर दिये गये और कुछ दिनों के बाद आवास के एक-एक ईंट मय मलबे के गायब हो गये और पूरी भूमि पर भी अवैध रूप से कब्जा करा दिया गया। जबकि गायब हुए आवासों के दाहिने और बांये और सामने तीन-तीन आवासों सहित दर्जनों ब्लाक बने हुए हैं। जिनके रेल कर्मी निवास कर रहे हैं।

क्या हुआ लाखों का मलवा और ईंट?
रेल की भूमि को तो कब्जा करा दिया गया, लेकिन इस रेल भूमि पर बने रेल आवासों के ईंट रेल के लाइन, गाटर आदि कहां गये? कौन अधिकारी की संलिप्तता है? यह जांच का विषय है। इस सम्बन्ध में कई बार शिकायत भी की गयी, लेकिन अब तक कोई कार्यवाई नहीं हुई।

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