
Paddy Crop Alert: धान की फसल इस समय ऐसी अवस्था में पहुंच रही है। जब फाल्स स्मट यानी हल्दिया रोग और गंधी बग का प्रकोप फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। बलरामपुर कृषि विभाग ने किसानों को खेतों की लगातार निगरानी करने की सलाह दी है। बालियों में दाने की जगह गांठ दिखाई दे या धान के दानों से रस चूसने वाला कीट नजर आए तो तुरंत बचाव के उपाय करें। किसान फसल की फोटो WhatsApp नंबर पर भेजकर विशेषज्ञों से सलाह भी ले सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में खरीफ की प्रमुख फसल धान में इस समय बालिया निकल रही है। ऐसे में फाल्स स्मट (हल्दिया रोग) और गंधी बग के प्रकोप की आशंका बनी हुई है। बलरामपुर कृषि विभाग ने किसानों को समय रहते इनकी पहचान कर बचाव के उपाय करने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि खेतों की नियमित निगरानी करने से शुरुआत में ही बीमारी और कीट का पता लगाया जा सकता है। और फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।
फाल्स स्मट धान में होने वाला फफूंद का रोग है। इसका असर खासतौर पर धान की बालियों में दिखाई देता है। रोग लगने पर सामान्य दानों की जगह गोल-गोल गांठ जैसी संरचना बनने लगती है। शुरुआत में इनका रंग हल्का पीला होता है। बाद में ये सूखकर हरे या काले रंग की हो सकती हैं। कृषि विभाग के अनुसार धान की बालियां निकलने और दानों में दूध बनने की अवस्था में फफूंदनाशी का छिड़काव किया जा सकता है। हाइड्रॉक्साइक्लोराइड 77 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की मात्रा 500 से 600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा एजोक्सीस्ट्रोबिन 18.2 प्रतिशत और डाइफेनोकोनाजोल 11.4 प्रतिशत एससी की 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है।
धान की फसल में गंधी बग भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। यह कीट भूरे रंग का होता है। इसके शरीर से विशेष प्रकार की गंध आती है। इसके प्रौढ़ और शिशु दोनों धान को नुकसान पहुंचाते हैं। यह कीट खासतौर पर धान की बालियों में दूध बनने की अवस्था में दानों का रस चूसता है। इससे दाने कमजोर, अधूरे या खराब हो सकते हैं। इसका सीधा असर फसल के उत्पादन पर पड़ता है। इसके नियंत्रण के लिए फेनवेलरेट 0.04 प्रतिशत डीपी अथवा मैलाथियान धूल 5 प्रतिशत डीपी या अन्य संस्तुत पाउडर का 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुरकाव किया जा सकता है। थायोमेथोक्साम 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी की 100 ग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा को 500 से 600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की भी सलाह दी गई है।
कृषि विभाग ने किसानों से कहा है कि वे धान के खेतों की नियमित जांच करते रहें। किसी बीमारी या कीट के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर देरी न करें और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही दवा का इस्तेमाल करें। किसान सहभागी फसल निगरानी एवं निदान प्रणाली के WhatsApp नंबर 9452247111 और 9452257111 पर अपनी फसल की फोटो भेजकर समस्या की पहचान और उसके समाधान की सलाह ले सकते हैं।