गोंडा

Panchayat Election 2026: 6 महीने से दौड़ रहे दावेदार, लाखों खर्च भी किए; अब एक फैसले से बदल सकता पूरा खेल!

Gonda Panchayat Election 2026 को लेकर गांवों में चुनावी सरगर्मी तेज है। 1192 ग्राम पंचायतों की मतदाता सूची में 26.74 लाख वोटर दर्ज हैं। चुनाव की तारीख और आरक्षण सूची का इंतजार है। छह महीने से जनसंपर्क कर रहे संभावित प्रत्याशियों की चिंता बढ़ गई है। आरक्षण बदलते ही उनकी पूरी तैयारी और खर्च पर पानी फिर सकता है।
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Aug 31, 2026
Panchayat election
सांकेतिक फाइल फोटो पत्रिका

Gonda Panchayat Election2026:उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में पंचायत चुनाव की तैयारी आगे बढ़ चुकी है। जिले की 1192 ग्राम पंचायतों की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन हो गया है। इसमें 26.74 लाख मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। 1550 मतदान केंद्र और 4308 बूथ बनाए गए हैं। खास बात यह है कि अभी चुनाव की तारीख घोषित नहीं हुई है। आरक्षण सूची भी जारी नहीं हुई है। इसके बावजूद गांवों में चुनावी माहौल बन गया है। संभावित प्रत्याशी महीनों से जनसंपर्क में जुटे हैं। अब उनकी नजर तारीख और आरक्षण पर है।

गोंडा जिले में गांवों की सरकार चुनने की तैयारी पूरी होने लगी है। जिले में कुल 1192 ग्राम पंचायतें हैं। इन पंचायतों की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन हो चुका है। अंतिम सूची में 26,74,509 मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। वर्ष 2021 में यह संख्या 26,68,453 थी। यानी इस बार मतदाताओं की संख्या में मामूली बढ़ोतरी हुई है। चुनाव के लिए जिले में 1550 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर कुल 4308 बूथ होंगे। लेकिन अभी एक बड़ा सवाल बाकी है। चुनाव कब होगा? सरकार ने अभी पंचायत चुनाव की तारीख घोषित नहीं की है। आरक्षण की अंतिम सूची भी सामने नहीं आई है। इसके बावजूद गांवों में चुनावी हलचल तेज हो गई है।

छह महीने से चल रहा जनसंपर्क

ग्राम प्रधान से लेकर क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य पद के दावेदार सक्रिय हैं। कई संभावित प्रत्याशी छह महीने से गांव-गांव घूम रहे हैं। कई लोग अपने क्षेत्र के तीन-चार चक्कर लगा चुके हैं। सुबह से शाम तक जनसंपर्क चल रहा है। शुरुआत में प्रत्याशी के पहुंचने पर खूब स्वागत होता था। चाय आती थी। कुर्सी लगती थी। बड़े-बुजुर्ग आशीर्वाद देते थे। अब तस्वीर कुछ बदल गई है। कई ग्रामीण बाइक या कार देखते ही समझ जाते हैं कि कोई दावेदार आया है। फिर मजाक में कहते हैं, 'लो भइया, फिर वोट मांगने वाले आ गए।'

सांकेतिक फाइल फोटो पत्रिका

कई जगह प्रत्याशियों से सीधा सवाल

'का भइया, चुनाव की तारीख आ गई का?'
जवाब मिलता है- अभी नहीं। ग्रामीण फिर हंसकर कहते हैं, 'तौ फिर अभी से काहे हांफ रहे हो?'

खर्च बढ़ा, आरक्षण का डर भी

संभावित प्रत्याशियों की सबसे बड़ी चिंता आरक्षण को लेकर है। जिस सीट के लिए महीनों से मेहनत हो रही है। अगर आरक्षण बदल गया तो पूरा समीकरण बिगड़ सकता है। गांवों में कुछ दावेदारों के लाखों रुपये खर्च करने की चर्चा है। कहीं समर्थकों की खातिरदारी हो रही है। कहीं वाहन दौड़ रहे हैं। सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में भी मौजूदगी बढ़ गई है। कुछ दावेदारों के बारे में तो चार धाम की यात्रा कराने तक की चर्चा है। हालांकि खर्च की इन रकमों का कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। ये बातें फिलहाल ग्रामीण चर्चाओं तक सीमित हैं। चौपालों पर लोग मजाक भी कर रहे हैं। एक बुजुर्ग की बात खूब चर्चा में है। 'असली टिकट तो आरक्षण देगा। बाकी सब ट्रायल चल रहा है।'

थाने से लेकर सोशल मीडिया तक सक्रियता

चुनावी हलचल का असर थानों तक दिख रहा है। संभावित प्रत्याशियों की आवाजाही बढ़ गई है। किसी समर्थक की समस्या हो या गांव का विवाद, दावेदार अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में पीछे नहीं रहना चाहते। सोशल मीडिया पर भी सक्रियता बढ़ी है। किसी बुजुर्ग से मिलना हो। किसी बीमार का हाल पूछना हो। शादी में जाना हो या धार्मिक कार्यक्रम में पहुंचना हो। फोटो जरूर खिंचती है। फिर वही फोटो सोशल मीडिया पर पहुंच जाती है। कैप्शन होता है- 'जनता का आशीर्वाद लेने पहुंचे भावी प्रत्याशी।' ग्रामीण अब इस पर भी चुटकी ले रहे हैं। कहते हैं, 'जहां फोटो न खिंचे, लगता है दौरा हुआ ही नहीं।'

विधायकों के सामने भी मुश्किल गणित

पंचायत चुनाव की हलचल से स्थानीय विधायकों की चिंता भी बढ़ी है। कई जगह मौजूदा प्रधान के खिलाफ नाराजगी हो सकती है। वहीं नए दावेदार भी लगातार सामने आ रहे हैं। किसी एक के साथ खड़े होने पर दूसरा खेमा नाराज हो सकता है। सभी को साथ लेकर चलना भी आसान नहीं है।
इसलिए विधायकों के सामने भी बड़ा राजनीतिक गणित है।
गांवों में लोग मजाक कर रहे हैं। प्रधान का चुनाव बाद में होगा। विधायक की परीक्षा पहले शुरू हो गई है।
फिलहाल अब दावेदारों की नजर चुनाव की तारीखों का ऐलान और आरक्षण सूची पर टिकी हुई है।

तारीख आयोग बताएगा, आरक्षण किस्मत, तब तक प्रत्याशी पेट्रोल जलाएगा

गांवों में अब नया चुनावी मुहावरा भी सुनाई दे रहा है। 'तारीख आयोग बताएगा, आरक्षण किस्मत बताएगा और तब तक प्रत्याशी पेट्रोल जलाएगा।' चुनाव का मैदान अभी आधिकारिक रूप से नहीं खुला है। लेकिन दावेदारों की दौड़ शुरू हो चुकी है। फैसला अब तारीख और आरक्षण सूची आने के बाद होगा।

Updated on:
31 Aug 2026 03:36 pm
Published on:
31 Aug 2026 03:36 pm