नवजात शिशुओं की मौत पर केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने मंडलायुक्त को पत्र लिखकर गैर-पंजीकृत अस्पतालों और दलाल डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। मंत्री ने सरकारी अस्पतालों की अनियमितताओं पर भी गंभीर सवाल उठाए।
गोंडा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने मंडलायुक्त देवीपाटन मंडल को पत्र लिखकर जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में हो रही अनियमितताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंत्री ने खास तौर पर एक गैर-पंजीकृत अस्पताल में नवजात शिशुओं की मौत का मुद्दा उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि दो दिन पहले महिला अस्पताल और सीएचसी कटरा बाजार में जन्मे नवजात बच्चों को परिजन इलाज के लिए “एसबीएस नामक तथाकथित अस्पताल” के एनआईसीयू में ले गए थे। लेकिन वहां डॉक्टर की लापरवाही के चलते उनकी मौत हो गई। जांच में यह भी सामने आया कि जिस अस्पताल में बच्चों को भर्ती कराया गया, वह बिना पंजीकरण के संचालित हो रहा है।
कीर्तिवर्धन सिंह ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि गोंडा जिले में कई अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। उन्होंने इसे विभागीय उदासीनता करार देते हुए कहा कि ऐसी लापरवाही से न केवल मरीजों की जान खतरे में पड़ती है। बल्कि सरकार की छवि भी धूमिल होती है। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में तैनात कुछ डॉक्टर अपने दलालों के जरिए मरीजों को गुमराह कर निजी अस्पतालों में भेजते हैं। मंत्री ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह सीधे-सीधे मरीजों के साथ धोखा है। जनता का भरोसा तोड़ने जैसा है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, अस्पतालों में दलाली और निजी अस्पतालों के नेटवर्क पर अंकुश लगाया जाए। ताकि मरीजों को सरकारी अस्पतालों में ही बेहतर और पारदर्शी इलाज मिल सके। यह मामला एक बार फिर से सवाल खड़ा करता है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग कब तक अपनी जिम्मेदारी से बचता रहेगा। और कब तक मरीजों की जिंदगी दांव पर लगती रहेगी।