UP Board Exam 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान गोंडा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि गोंडा नकल की मंडी है। इसके बाद जिले को संवेदनशील श्रेणी में रखा जा रहा है। इस बार गोंडा समेत 18 जिले संवेदनशील श्रेणी में है। जिनकी निगरानी परीक्षा के दौरान सीधे शासन स्तर से होगी।
उत्तर प्रदेश में यूपी बोर्ड परीक्षाओं को नकलमुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इस बार सख्त कदम उठाए हैं। वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा से पहले 18 जिलों को अति संवेदनशील घोषित किया गया है। जिन पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं को लेकर व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए परिषद ने राज्य के 18 जिलों को अति संवेदनशील की श्रेणी में रखा है। इन जिलों में पहले भी सामूहिक नकल, पेपर लीक की कोशिशों और परीक्षा व्यवस्था में अव्यवस्था जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं।
गोंडा जिला पहले से ही इस श्रेणी में शामिल रहा है।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान एक जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोंडा को नकल की मंडी बताया था। उन्होंने कहा था कि यहां नकल माफिया इतने सक्रिय हैं कि नकल कराने के लिए टेंडर निकलने जैसी स्थिति बन जाती है। इसके बाद से ही गोंडा को परीक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना जाने लगा।
माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह के अनुसार यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 18 फरवरी 2026 से शुरू होकर 12 मार्च 2026 तक चलेंगी। इस दौरान परीक्षा केंद्रों पर अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए कड़ी निगरानी की व्यवस्था की जा रही है। संवेदनशील जिलों में शासन स्तर से सीधे निगरानी की जाएगी। और हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी।
परिषद ने स्पष्ट किया है कि नकल माफिया और असामाजिक तत्वों को पहले से चिन्हित किया जाएगा। उनके खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की जाएगी। ताकि परीक्षा के दौरान कोई गड़बड़ी न हो। गोपनीय प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रश्नपत्रों की ढुलाई से लेकर वितरण तक हर स्तर पर सतर्कता बरती जाएगी।
अति संवेदनशील घोषित किए गए जिलों में आगरा, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, एटा, कासगंज, प्रयागराज, कौशांबी, प्रतापगढ़, हरदोई, कन्नौज, आजमगढ़, बलिया, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, देवरिया और गोंडा शामिल हैं। शासन ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर काम करें। परीक्षा केंद्रों की निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण वातावरण में नकलविहीन परीक्षा कराना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। यदि कोई व्यक्ति परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित करने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।