गोपालगंज

मदद या मजाक? दिव्यांग बच्ची को मिली ट्राइसाइकिल 3 दिन में दे गई जवाब, अब फिर घसीटकर स्कूल जाने को मजबूर सोनी

बिहार के गोपालगंज ज़िला प्रशासन ने दिव्यांग छात्रा सोनी कुमारी का वीडियो वायरल होने के बाद आनन-फानन में उसे जो ट्राइसाइकिल दिया गया था, वह महज तीन दिनों में ही कबाड़ हो गई।

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ट्राइसाइकिल के साथ दिव्यांग बच्ची सोनी (फोटो-X)

बिहार के गोपालगंज से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो प्रशासनिक व्यवस्था की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दिव्यांग बच्ची सोनी कुमारी, जो अपने हौसले और संघर्ष के कारण सोशल मीडिया पर चर्चा में आई थी, अब एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार, इसका कारण उसे मिली मदद नहीं, बल्कि मदद के नाम पर उसके साथ किया गया मजाक है। जिला प्रशासन द्वारा सोशल मीडिया पर वाहवाही लूटने के लिए सोनी को जल्दबाजी में जो ट्राइसाइकिल दी गई थी, वह सिर्फ तीन दिनों में ही कबाड़ बन गई।

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पैर घसीटते हुए स्कूल जाती थी सोनी

15 साल की सोनी कुमारी गोपालगंज के भोरे प्रखंड के हुस्सेपुर गांव की रहने वाली है। दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद, वह हर दिन लगभग दो किलोमीटर पैर घसीटते हुए अपने स्कूल पहुंचती थी। जब उसके संघर्ष की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हुई, तो इसने हर किसी को अंदर तक झकझोर दिया। कुमार विश्वास और सोनू सूद जैसी जानी-मानी हस्तियों ने भी सोशल मीडिया पर उसका फोन नंबर मांगा ताकि वे उसकी मदद कर सकें।

मैथिली ठाकुर की पहल के बाद मिली थी ट्राइसाइकिल

BJP विधायक और लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने इस मामले को लेकर गोपालगंज के जिलाधिकारी (DM) से फोन पर व्यक्तिगत रूप से बात की। इस बीच, सोशल मीडिया पर लोगों ने मांग की कि बिहार सरकार और जिला प्रशासन सोनी को एक ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराएं। इस जन-दबाव के बाद, प्रशासन आखिरकार हरकत में आया, वे आनन-फानन में सोनी के घर पहुंचे और उसे एक ट्राइसाइकिल भेंट की। प्रशासन ने बाद में इस घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जिससे उन्हें काफी प्रचार मिला। लेकिन, उस मदद की सच्चाई अब सामने आ गई है।

फटे टायरों वाली ट्राइसाइकिल

अब सोनी का एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि उसे दी गई ट्राइसाइकिल महज 3 से 4 दिनों में ही खराब हो गई। ट्राइसाइकिल के टायर पुराने और फटे हुए हैं, जिससे हवा भरने के बाद भी यह चलने लायक नहीं रही। इसका हैंडल भी टूट गया है और पूरी ट्राइसाइकिल जर्जर, पुरानी हालत में दिखाई दे रही है। असल में, जिस मदद को सोनी के स्कूल जाने के लिए उसका सहारा बनना था, वह अब एक बोझ बनकर रह गई है।

परिवार में निराशा

सोनी की मां, गुलायची देवी ने बताया कि जब उन्हें पहली बार ट्राइसाइकिल मिली थी, तो उन्हें लगा था कि उनकी बेटी को आखिरकार कुछ राहत मिलेगी। लेकिन, कुछ ही दिनों में कड़वी सच्चाई सामने आ गई। उन्होंने कहा, 'हमें लगा था कि हमारी बेटी अब आसानी से स्कूल जा पाएगी, लेकिन यह चीज तो बिल्कुल बेकार निकली।'

ट्राईसाइकिल मिले या न मिले, मैं स्कूल जरूर जाऊंगी

इस भद्दे मजाक के बाद भी, 15 साल की सोनी का हौसला टूटा नहीं है। पिता के साये के बिना और गरीबी में पल रही सोनी ने कहा, 'तो क्या हुआ अगर ट्राईसाइकिल टूट गई? मैं तो वैसे ही स्कूल जाऊंगी जैसे पहले जाती थी। मैंने ठान लिया है कि मैं पढ़ाई करूंगी और डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करूंगी।'

सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूटा

जब इस टूटी हुई ट्राइसाइकिल का वीडियो एक बार फिर वायरल हुआ, तो गोपालगंज जिला प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि क्या बिहार सरकार के पास एक गरीब और दिव्यांग लड़की को देने के लिए एक भी नई ट्राइसाइकिल नहीं थी? उनका कहना है कि स्टोररूम से एक पुरानी, ​​टूटी हुई ट्राइसाइकिल निकालकर किसी को थमा देना, किसी बड़े अपमान से कम नहीं है। कुछ यूजर्स ने तो यह भी आरोप लगाया है कि भ्रष्ट अधिकारियों ने ट्राइसाइकिल खरीदने के लिए आए पैसों में ही अपना हिस्सा मार लिया। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर इसी तरह की प्रतिक्रियाएं और गुस्से का इजहार लगातार देखने को मिल रहा है।

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