इन अनोखी शादी का गवाह बनी बाबा गोरखनाथ की धरती
कब, कहां और किससे मिलना हो जाए, यह उपरवाला तय करता है। गोरखपुर में अनोखेे शादी के गवाह बने लोगों के लिए ये बातें बिल्कुल सही लगी। तभी तो महज 34 इंच के दुल्हे को भी 33 इंच लंबी उनकी हमसफर आखिरकार मिल ही गई। सोमवार को जब यह जोड़ी सात जन्मों के बंधन में बंधी तो आशीर्वाद देने वालों का तांता लग गया।
पढ़े लिखे नौजवान जिसकी लंबाई करीब तीन फीट है उसे भी उसी के कदकाठी केे सापेक्ष जीवनसाथी मिलने से हर कोई खुश है।
करीब चार दशक पहले की बात है खजनी क्षेत्र के विशुनपुरा गांव के रहने वाले विश्वनाथ पाठक के घर जब किलकारियां गूंजी तो किसी के भी खुशी को कोई ठिकाना नहीं रहा। घर-आंगन बेटे की किलकारियां से गूंज उठा था। लेकिन बेटे की उम्र ज्यों-ज्यों बढ़ रही थी इनके चेहरे पर शिकन आती जा रही थी। वजह यह कि बेटे सुनील पाठक की लंबाई जन्म के बाद कुछ समय तक बढ़ी लेकिन एक अवस्था के बाद उनकी लंबाई रुक गयी। कम लंबाई वाले सुनील किसी के सहानुभूति के पात्र बनते तो किसी के हंसी के। परिवारवाले इनको लेकर परेशान रहते लेकिन सुनील ने अपनी लम्बाई को लेकर कभी हार नहीं मानी। वह अपनी लंबाई को मात अपनी पढ़ाई से देने की ठानी। उन्होंने स्नातक किया, स्नातकोत्तर किया। इसके बाद संस्कृत से पीएचडी करके मानद उपाधि ली। इन्होंने ज्योतिष की भी तालीम हासिल की।
पर अपने पढ़े लिखे बेटे के लिए परिवारवालों को शादी की चिंता सताने लगी। उम्र बढ़ती जा रही थी लेकिन हमसफर की तलाश खत्म नहीं हो रही थी। लेकिन कहते हैं कि जोड़ियां तो आसमान में तय होती हैं। शायद यही सही है। कुछ ही महीने पहले सुनील को उनकी हमसफर मिल गई। घर वालों को लड़की के बारे में पता चला तो वे बहुत खुश हुए। रिश्ता तय हुआ। शहर के रुस्तमपुर इलाके की रहने वाली सारिका मिश्र के घरवाले शगुन लेकर पहुंचे। दोनों घरों के लोगों ने सहमति जताई। फिर सोमवार को शहनाई गूंज उठी।
सुनील की उम्र करीब 42 साल है जबकि सारिका की उम्र लगभग 36 वर्ष है। सारिका की लंबाई 33 इंच है। सारिका के पिता भगवती प्रसाद मिश्र अब इस दुनिया में नहीं है। मां ऊषा देवी ने ही इनका लालनपालन किया।