
शिक्षामित्र, आंगनबाड़ी कार्यकत्र्रियों के बाद अब प्र्रेरक भी सरकार के विरोध में उतर आए हैं। मुख्यमंत्री के शहर में सोमवार को प्रेरकों ने बकाया मानदेय भुगतान के लिए अनोखे ढंग से प्रदर्शन किया। प्रेरकों ने शरीर पर पत्ता लपेटकर शहर में भिक्षाटन किया। प्रेरकों का आरोप था कि कई महीने से बकाया भुगतान नहीं होने से प्रेरक भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं।
सोमवार को जिले भर के प्रेरक शहर में एकत्र हुए। बकाया भुगतान और संविदा बढ़ाए जाने की मांग को लेकर आंदोलित प्रेरकों ने शहर में भिक्षाटन कर प्रदर्शन किया। शरीर में पत्ता लपेट कर प्रेरकों ने टाउनहाल के आसपास कटोरा लेकर भीख मांगा। इनका कहना था कि काम कराने के बाद सरकार बकाया भुगतान नहीं कर रही है। मानदेय नहीं मिलने से वे लोग भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। घर-परिवार का खर्च नहीं चल रहा। लोगों ने उधर देना बंद कर दिया है। प्रेरकों का आरोप था कि महोत्सवों पर सरकार को खर्च करने के लिए करोड़ों अरबों हैं लेकिन प्रेरकों के मानदेय भुगतान के लिए पैसे नहीं हैं।
प्रेरक संघ के अध्यक्ष मृत्युंजय पाठक ने कहा कि यह सरकार फिजूलखर्ची पर करोड़ों खर्च कर रही है लेकिन मानदेय पर काम करने वाले प्रेरकों को देने के लिए धन का रोना रो रही है। जिस प्रदेश में लाखों लोग मानदेय के अभाव में भुखमरी की कगार पर हो उस प्रदेश को उत्तम प्रदेश कैसे कह सकते हैं। सरकार को अपने नागरिकों का ध्यान रखना चाहिए। आखिर हम भी इसी प्रदेश के रहने वाले लोग हैं।
प्रेरकों ने चेताया कि अगर उन लोगों के मानदेय का भुगतान नहीं हुआ तो आगामी लोकसभा चुनाव में प्रेरक बीजेपी का पुरजोर विरोध करेंगे।