गोरखपुर

यहां इस बार ‘टीपू’ फंस सकते हैं चक्रव्यूह में, अखिलेश के मास्टर स्ट्रोक से सीएम योगी को मिली थी करारी शिकस्त

सपा के लिए इस सीट पर चमत्कार दोहराना आसान नहीं होगा, ये हैं वजहें

2 min read
Shivpal akhilesh Yogi

समाजवादी पार्टी के लिए इस लोकसभा चुनाव में गोरखपुर सीट पर उपचुनाव वाला चमत्कार दोहराना आसान नहीं होगा। विपक्षी एकता, बीजेपी की अंदरूनी राजनीति व सत्ता के खिलाफ जनाक्रोश से जीत का सेहरा बांधने में कामयाब रही सपा को इस बार कई मोर्चाें पर लड़ना पड़ सकता है।

लोकसभा उपचुनाव के बाद गोरखपुर में समाजवादी पार्टी लगातार सक्रियता से लगी हुई है। कई दशक के बाद गोरखपुर में जीत हासिल करने से कार्यकर्ताओं के भी हौसले बुलंद है। लेकिन गठबंधन की राजनीति की राह चलकर एक बार फिर इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए पार्टी को काफी पसीना बहाना पड़ सकता है।

ये भी पढ़ें

नारायण दत्त तिवारी के अंतिम दर्शन के अवसर पर मुख्यमंत्री के वायरल वीडियो पर कही ये बातें

शिवपाल फैक्टर भी करेगा काम

लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को सबसे अधिक दिक्कतें अपनों से झेलनी पड़ सकती है। शिवपाल यादव के समाजवादी सेकुलर मोर्चा बनाने के बाद कई पुराने समाजवादी इस बैनर तले आ चुके हैं। तमाम आने को इच्छुक भी हैं। गोरखपुर में सपा के तीन के बार जिलाध्यक्ष रहे राममिलन यादव को शिवपाल के मोर्चा की कमान दी गई है। जानकार बताते हैं कि गोरखपुर में शिवपाल का संगठन अगर मजबूत हुआ तो सपा को सीधे तौर पर नुकसान झेलना पड़ सकता है।

निषाद वोटरों को एकजुट रखना मुश्किल हो सकता

गोरखपुर लोकसभा सीट पर निषाद वोटरों का अच्छा खासा प्रभाव है। यादव, मुस्लिम व अनुसूचित जाति के वोटरों के समीकरण ने उपचुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त दिलाई थी। चुनाव के बाद से ही बीजेपी लगातार निषाद वोटरों को रिझाने में लगी हुई है। कई महत्वपूर्ण पदों पर इस जाति का प्रतिनिधित्व देकर बीजेपी इस वोट को अपने पाले में करने में लगी हुई है।
दूसरी ओर निषाद वोटरों पर गोरखनाथ मंदिर का अच्छा खासा प्रभाव है। पिछले उपचुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का खेमा भी ऐसा ही दावा कर रहा था। मंदिर के किसी भी महंत के मैदान में आने के बाद निशाद वोटर बहुमत में बीजेपी को वोट करते रहे। लेकिन पिछली बार मंदिर से बाहर का प्रत्याशी उतारने के बाद निषाद वोटरों ने एकजुटता दिखाकर बीजेपी के खिलाफ वोट किया था। हालांकि, समाजवादी पार्टी को निषाद दल के साथ गठबंधन होने की वजह से खासा वोट मिल सकता है। निषाद दल का अपने सजातीय वोटरों पर प्रभाव भी है।


उपचुनाव में सपा की कोर टीम कैंप की थी

गोरखपुर उपचुनाव में समाजवादी पार्टी की कोर टीम ने कैंप किया था। सपा के दिग्गज इस चुनाव के लिए गांव-गांव, वार्ड-वार्ड में जाकर वोट मांगे थे। लेकिन लोकसभा चुनाव में सभी सीटों पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों के लिए प्रचार करने की वजह से उतना समय इस सीट पर कोई नहीं दे पाएगा जितना उपचुनाव में दिया था।


उपचुनाव में यह रहा था परिणाम

पांच बार से गोरखपुर सीट पर सांसद रहे योगी आदित्यनाथ के यूपी का मुख्यमंत्री बनने के बाद सदर सीट खाली हो गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संसद सदस्य पद से इस्तीफा देने के बाद उपचुनाव कराया गया। लेकिन इस चुनाव में विपक्ष ने अपनी एकता का शानदार मुजाहिरा किया। दशकों से दुश्मन बसपा-सपा एकमंच पर आए। छोटे-बड़े सभी दल समाजवादी पार्टी को समर्थन देते दिखे। सपा ने छोटे दलों यथा निषाद दल व पीस पार्टी को भी साथ लिया। वर्षाें से निषाद समाज के लिए काम कर रहे निषाद दल के अध्यक्ष डाॅ.संजय निषाद के बेटे को सपा ने अपने सिंबल पर लड़ाया। आलम यह कि विपक्ष की एकजुटता ने बाजी मार ली। सत्ताधारी दल बीजेपी के हाथों से तीन दशक तक अजेय रहने वाली सीट पर जीत हासिल कर करारी शिकस्त दी।

ये भी पढ़ें

विधान परिषद के सभापति रमेश यादव के पुत्र की मौत, दूसरी पत्नी ने लगाया यह आरोप
Published on:
22 Oct 2018 11:57 am
Also Read
View All