आजमगढ़ के मुबारकपुर से पहली बार हुए थे विधायक, हर सत्ता के करीबी रह चुकेे
गोरखपुर। नवनिर्वाचित एमएलसी यशवंत सिंह का गोरखपुर से पुराना सबंध रहा है। सपा में रहते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्याथ के लिए सीट छोड़ने और अबकी बार भाजपा से निर्विरोध एमएलसी बने यशवंत सिंह ने राजनीति की शुरूआत गोरक्षनगरी से की थी।
अस्सी के दशक में आजमगढ़ से आकर मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज (वर्तमान में मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय) में बीटेक करते हुए यशवंत को राजनीति का चस्का लगा। छात्र राजनीति से राजनीति का ककहरा सीखने के बाद राजनीति में ऐसे रमे कि सत्ता चाहे जिसकी भी रही हो हर बार सत्ता संभाल रहे मुखिया के करीबी बनते देर न लगी।
पुराने लोग अस्सी के दौर को याद करते हुए बताते हैं कि बीजेपी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह उस समय छात्र राजनीति में थे। वह दौर छात्र राजनीति में धु्रवीकरण का दौर था। यही वह दौर था जब छात्र राजनीति में बाहुबलियों और माफियाओं का सीधा दखल होता था। उस समय बीटेक कर रहे यशवंत भी अन्य छात्रों की तरह छात्रनेता देवेंद्र प्रताप सिंह के साथ राजनीति में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते थे।
उनको गोरखपुर में जानने वाले लोग बताते हैं कि यशवंत सिंह ने राजनीति में सफलता बहुत कम समय में पायी। आजमगढ़ के मुबारकपुर से पहली बार विधायक बनने वाले यशवंत सिंह समाजवादी पार्टी ही नहीं कल्याण सिंह के राज में बीजेपी में, मायावती के शासनकाल में बसपा में रह चुके हैं। इस बार जब बीजेपी की प्रदेश में सरकार बनी तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रभावित होकर उन्होंने सपा में रहते हुए अपनी एमएलसी की सीट छोड़ दी।
हालांकि, बीजेपी ने भी सहयोग के बदले रिटर्न गिफ्ट के रूप में पुनः
एमएलसी बना दिया।
गोरखपुर में ससुराल व समधियान दोनों
एमएलसी यशवंत सिंह की गोरखपुर और योगी आदित्यनाथ से लगाव यूं ही नहीं है। सालों तक यहां रहे एमएलसी यशवंत सिंह की ससुराल भी यही है। यही नहीं उनके बेटे की भी ससुराल गोरखपुर में ही है।
गोरखनाथ मंदिर के करीबी शहर के होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश सिंह कौशिक की सुपुत्री वंदना सिंह की शादी एमएलसी यशवंत सिंह के बेटे से हुई है। करीब सात साल पहले यह नातेदारी जुडी थी। उस समय बहुत सारे लोग जुटे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस शादी के शरीक हुए थे। तब वह सांसद हुआ करते थे। कई घंटे तक वह इस समारोह के रहे। मंदिर से कौशिक परिवार का बहुत पहले का संबंध रहा है। यह शादी मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के प्रांगण से ही हुई थी।
पुराने लोग बताते हैं कि गोरखपुर में ही यशवंत सिंह की ससुराल भी थी। उनके ससुर बीडीओ थे और गोरखपुर में ही पोस्टेड थे।
चंद्रशेखर के नाम से ट्रस्ट भी
यशवंत सिंह ठाकुर राजनीति के जाने पहचाने नाम हैं। उन्होंने बलिया में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के नाम ट्रस्ट बनाया हुआ है।