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जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहे रोग, गोरखपुर अतिसंवेदनशील

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जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहे रोग, गोरखपुर अतिसंवेदनशील

जलवायु परिवर्तन से तापमान में वृद्धि हो रही जिसकी वजह से विषाणुओं व जीवाणुओं विशेष कर मच्छरों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही। लोगों में फ्लू, वायरल फीवर, मलेरिया, डेंगू और इंसेफेलाइटिस जैसी
बीमारियों की वजह जलवायु भी है। गोरखपुर क्षेत्र इस मामले में बेहद संवेदनशील है।
ये बातें यूपी राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण के उपाध्यक्ष/ रिटायर्ड ले.जनरल रविंद्र प्रताप शाही ने कही। उन्होंने कहा कि यूपी का पहला जिला गोरखपुर है जहां क्लाइमेट सेल का गठन किया गया है। जलवायु परिवर्तन का
प्रभाव हमारे रहन-सहन, दिनचर्या पर पड़ता है। सबको अपने आसपास के वातावरण को शुद्ध रखने में सहायक बनना होगा।
उन्होंने कहा कि गोरखपुर का रामगढ़ताल नेचर द्वारा दिया गया गिफ्ट है जिसे आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखना परम आवश्यक है। कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को यदि समय रहते सीमित नही किया गया तो पृथ्वी पर आजीविका संकट के कारण मानव जीवन भी खतरे में पड़ जायेगा। पौधारोपण से हम पृथ्वी को बचा सकते हैं, इससे पर्यावरण स्वच्छ एवं धरा हराभरा होगी।
जिलाधिकारी के. विजयेन्द्र पाण्डियन ने बताया कि क्लाइमेट सेल में मौसम की निगरानी, मौसम का पूर्वानूमान तथा पूर्व सूचना प्राणाली विकसित कर सम्भावित आपदाओ के प्रभावों को न्यून किए जाने का प्रयास किया जाएगा।
अपर जिलाधिकारी वि/रा विधान जायसवाल ने बताया कि क्लाइमेट सेल को क्रियाशिल किये जाने हेतु प्राधिकरण स्तर पर एक आटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित किया गया है। सेल सम्बंधी कार्यो को निस्तारित किये जाने हेतु
यूनीसेफ से सहयोग से विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही है। वर्तमान में क्लाइमेट सेल क्रियाशील है व सम्भावित आपदाओ सम्बंधी महत्वपूर्ण सूचनाआंे का अद्यतन कर दस्तावेजीकरण किया जा रहा है और प्राप्त सूचनाओ का आवश्यक कार्यवाही हेतु सम्बंधित विभागो को प्रेषित की जा रही है।
आपदा प्रबंध प्राधिकरण के परियोजना निदेशक बलवीर सिंह, अदिति उमराव, यूनीसेफ की डाॅ. उर्वशी चन्द्रा ने भी अपने विचार रखे।

Published on:
17 Nov 2018 03:52 pm
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