गोरखपुर डीएम मंगलवार को अचानक सीएचसी सहजनवां पहुंचे जहां गंदगी देखते ही उनका पारा हाई हो गया, इस मौके पर उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को जमकर फटकार लगाए
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जिले में फिलहाल अधिकारियों की कार्यप्रणाली संतोषजनक जनक नहीं है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सीएम डैशबोर्ड की अक्टूबर माह की रैंकिंग में गोरखपुर की रैंक लगातार तीसरी बार खिसकर पीछे चली गई है। अगस्त माह की रैंकिंग में जिला 62वें पायदान पर था, जहां से आठ स्थान फिसलकर सितंबर में 70वें स्थान और अब अक्टूबर में सबसे आखिरी पायदान यानी 75वें नंबर पर पहुंच गया है।
जैसा कि मालूम हो कि हर महीने सीएम डैशबोर्ड की ओर से राजस्व और विकास कार्यों की प्रगति के आधार पर जिलों की रैंकिंग जारी की जाती है। रैंकिंग में जिलों की प्रशासनिक दक्षता, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, और राजस्व निस्तारण की गति का मूल्यांकन आधार बनता है। जिला प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, गोरखपुर में बड़े पैमाने पर राजस्व वाद लंबित हैं। नामांतरण, वरासत और पैमाइश के साथ ही आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों का समय से निस्तारण नहीं हो पाने की वजह से भी जिले की रैंकिंग प्रभावित हुई है।
इन लंबित मामलों के कारण न केवल राजस्व कार्य प्रभावित होते हैं, बल्कि जनसुनवाई और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी असर पड़ता है। इस मामले में गोरखपुर के अधिकारियों का कहना है कि इस समय हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं चल रही हैं। समयबद्ध कार्य पूरा करने और राजस्व विवादों के शीघ्र निस्तारण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि रैंकिंग में सुधार हो सके।
CM डैशबोर्ड पर 49 विभागों के 110 सरकारी कार्यक्रमों की महीनेवार समीक्षा की जाती है। इसमें जनसुनवाई, जनकल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, राजस्व प्रबंधन, विकास कार्यों की प्रगति, और कानून-व्यवस्था जैसे बिंदु शामिल हैं। प्रत्येक जिले को विभिन्न मापदंडों पर अंक दिए जाते हैं। अधिकतम अंक पाने वाले जिले उच्च रैंक प्राप्त करते हैं।