गोरखपुर

पौधों को AI स्कैन कर खींचेगा औषधीय तत्व, डॉ. तूलिका मिश्रा के रिसर्च को UK से पेटेंट मिला

गोरखपुर विश्वविद्यालय की डॉ. तूलिका मिश्रा के रिसर्च व डिजाइन को ​यूके से पेटेंट मिला है, दो वर्षों के रिसर्च के दौरान लगभग 50 औषधीय पौधों पर टे​स्टिंग हुई। AI की मदद से अब इन पौधों से औषधीय तत्वों को स्कैन कर लिया जाएगा।

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Mar 24, 2026
फ़ोटो सोर्स: पत्रिका, डॉक्टर तूलिका मिश्रा

पौधों को स्कैन कर एआई उनमें से औषधीय तत्व खोज लेगा। इस नवाचार से दवा खोजने की प्रक्रिया अ​धिक तेज, सटीक और किफायती बन जाएगी। इस पर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तूलिका मिश्रा ने रिसर्च किया है। उनके रिसर्च और ​डिजाइन को यूके से पेटेंट मिला है।

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50 औषधीय पौधों की स्क्रीनिंग

डॉ. तूलिका के साथ ही देश के अलग-अलग संस्थानों के वैज्ञानिकों ने लगभग दो वर्ष तक रिसर्च किया। इस दौरान लगभग 50 औषधीय पौधों की स्क्रीनिंग की गई। बेहतरीन परिणाम आने के बाद पेटेंट के लिए दा​खिल किया गया। इस डिजाइन को पेटेंट मिल गया है।

औषधीय पौधों में जैव-सक्रिय यौगिकों की तीव्र पहचान

इस रिसर्च में औषधीय पौधों में जैव-सक्रिय यौगिकों की एआई आधारित तीव्र पहचान की गई। यह पेटेंट एक उन्नत तकनीकी प्रणाली से संबंधित है, जो औषधीय पौधों के यौगिकों की तेजी से स्क्रीनिंग कर उनकी संभावित औषधीय उपयोगिता का आकलन करने में सहायक है। इस कार्य को पारंपरिक वनस्पति ज्ञान और आधुनिक एआई तकनीक के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है, जो भविष्य में औषधीय अनुसंधान एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में नई दिशा प्रदान करेगा।

डॉ. तूलिका ने बताया कि यह एक डिजाइन पेटेंट है। एआई टेक्नोलाॅजी का प्रयोग करते हुए किसी पौधे के बायोऑब्जेक्टिव केमिकल का विश्लेषण जैसे अलकालॉयड, स्टेरायड, फेनॉल, टैनिंस की पहचान की जा सकती है।

डॉ. तूलिका का यह पांचवां पेटेंट

डॉ. तूलिका मिश्रा का यह पांचवां पेटेंट है, जिसमें एक कॉपीराइट भी शामिल है। वर्तमान रिसर्च में देश के वि​भिन्न ​​शिक्षण संस्थानों के वैज्ञानिकों ने योगदान दिया है। इनमें डॉ. तूलिका मिश्रा के अलावा डॉ. सीमा मंडल, डॉ. परशावेनी बालाराजू, राज्यलक्ष्मी मिश्रा, डॉ. सीमा नारखेडे, डॉ. थोडूर मनोहरन विजयलक्ष्मी व डॉ. रुचिका श्रीवास्तव शामिल हैं।

विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय

इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि यह उपलब्धि न केवल उनके संस्थान बल्कि देश के वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी गर्व का विषय है। एआई के सहयोग से किया गया यह नवाचार संभावनाओं के नए द्वार खोलेगा। इस पेटेंट के लिए पूरी टीम को बधाई।

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Updated on:
24 Mar 2026 11:48 pm
Published on:
24 Mar 2026 11:36 pm
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