गोरखपुर

Film Festival जेनेवा के वन्यजीव फिल्म समारोह का यह है गोरखपुर कनेक्शन

माइक पांडेय की वृत्तचित्र ‘ग्यामोः क्वीन आफ द माऊंटेंस’ को मिला पुरस्कार 

2 min read
Mike h pandey

गोरखपुर। यूपी में इको टूरिज्म के ब्रांड एंबेसडर व गोरखपुर के मूल निवासी माइक एच पांडेय की वृत्तचित्र ‘ग्यामोः क्वीन आफ द माऊंटेंस’ को ‘जैक्सन होल वन्यजीव फिल्म समारोह’ में विजेता घोषित किया गया है। यह समारोह संयुक्त राष्ट्र वन्य जीव संस्था सीआईटीईएस के सचिवालय द्वारा आयोजित किया गया था। तीन मार्च को जेनेवा में इस डाॅक्यूमेंट्री को पुरस्कृत किया गया। इस डाॅक्यूमेंट्री को ‘विग कैट फिल्म फेस्टिबल’ में प्रदर्शित की गई थी।
फिल्म के प्रस्तुतकर्ता एवं निर्माता माइच एच पाण्डेय ने अपने पुत्र गौतम पाण्डेय एवं दोयल त्रिवेदी के निर्देशन में ढाई साल में बनाई। यह फिल्म लद्दाख की पहाड़ियों में रहने वाले स्नो लैपर्ड पर आधारित है जिसमें एक मादा लैपर्ड अपने दो छोटे बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए किए संघर्ष को रेखांकित करती है।
इस फिल्म में एक यह संदेश भी है कि किस कदर मानव पर्यावरण को प्रदूषित कर जीव-जंतुओं के जीवन में दुश्वारियां ला रहा। एक सर्वे के अनुसार भारत में स्नो लैपर्ड की संख्या 200 से 250 के करीब हो चुकी है। सरकार ने स्नो लैपर्ड को दुर्लभ और संरक्षित जानवरों की श्रेणी में रखा गया है।
माइक बताते हैं कि फिल्म की नायिका स्नो लैपर्ड और उसके बच्चों की तलाश में उनको 17 से 18 हजार की फीट की ऊंचाई पर अतिशय ठंड में शूटिंग करनी पड़ी। बकौल माइक,‘मुझे खुशी है कि स्नो लैपर्ड और उसके दोनों शावक आज भी सुरक्षित है। स्थानीय लोगों को जागरूक कर हमारी टीम ने ईश्वर द्वारा बनाए गए इस दुर्लभ जीव के संरक्षण के लिए तैयार किया।’
सीआईटीईएस के महासचिव जॉन ई स्कैनलॉन ने माइक के काम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी फिल्में हमें बहुत ही व्यक्तिगत तरीके से वन्यजीव से जोड़ती हैं। यह हम सबको समझना होगा कि जंगलों को संरक्षित रखने की जिम्मेदारी सिर्फ हम मनुष्यों पर ही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही ये फिल्म मोबाइल और बड़े परदों पर भी पहुंचेगी। मीडिया की शक्ति का उपयोग कर हम इन बिग कैट के संरक्षण का महौल तैयार कर सकते हैं।

Updated on:
05 Mar 2018 02:59 am
Published on:
05 Mar 2018 09:09 am