90 के दशक में गोरखपुर का भी खाद कारखाना हुआ था बंद
गोरखपुर। रायबरेली जैसे हादसे की आशंका में गोरखपुर की खाद फैक्ट्री भी कई दशक पहले बंद करा दी गई थी। आलम यह कि बंद खाद कारखाना फिर कभी चालू न हो सका। अलबत्ता, इसकी जगह एक नई फैक्ट्री लगाने की कवायद अब जाकर शुरू है।
गोरखपुर खाद कारखाना, भारतीय उर्वरक निगम लिमिटेड (एफसीआईएल) की देश की पांच यूनिटों में से एक रहा। 20 अप्रैल 1968 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसका उद्घाटन किया था। उसके बाद यहां उत्पादन शुरू हुआ था। उस समय 2400 कर्मचारी इस फर्टिलाइजर में कार्य करते थे। एक पूर्व कर्मचारी बताते हैं कि 10 जून 1990 में फर्टिलाइटर के आमोनिया गैस प्लांट में रिसाव हुआ और गैस लीकेज हो गई। इसमें जेई पद पर तैनात मेद्यनाथ सिंह की मौत हो गई। अभी कुछ साल पहले ही पूरा देश भोपाल गैस त्रासदी देखा था। आशंकाएं लोगों के जेहन में बैठ गई। उसके बाद फर्टिलाइजर स्थानीय कर्मचारी यूनियन ने आंदोलन शुरू कर दिया। आंदोलन को लोगों ने सीधे 1984 में हुए भोपाल गैस त्रासदी से जोड़ दिया और मांग करने लगे कि जब फैक्ट्री के अंदर की सभी पाइप लाइन बदल नहीं दी जाती, तब तक फर्टिलाइजर नहीं चलेगा। कर्मचारी यूनियन के इस आंदोलन का साथ आस-पास के ग्रामीणों ने भी दिया और आंदोलन बड़ा होता गया। इसके बाद यह खाद कारखाना फिर कभी चल नहीं सका।
ऐसे शुरू हुआ गोरखपुर में नए खाद कारखाने का सफर
1990 में फर्टिलाइजर बंद होने के बाद कागज में लगातार चलता रहा। उसके बाद लगातार आंदोलन होता रहा। जब भी देश में कोई संसदीय चुनाव होता तो पीएम कैंडिडेट फर्टिलाइजर चलाने का दावा करता। एक रिकार्ड को देखें तो अभी तक छह प्रधानमंत्री फर्टिलाइजर को चलाने का वादा कर चुके थे। बीजेपी के पीएम प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने 24 जनवरी 2014 को मानबेला में जनसभा करने आए और मंच से ही वादा किया कि फर्टिलाइजर चलेगा। उसके बाद मई 2014 में जब नरेंद्र मोदी देश के सातवें पीएम बने तो फर्टिलाइजर की बात एक बार फिर उठी और मुद्दा बना। 27 अप्रैल 2015 को नीति आयोग की समिति गठित की गई और गोरखपुर खाद कारखाने के लिए 26 अगस्त 2015 को रिक्वेस्ट आफ क्वालिफिकेशन, 17 सितम्बर 2015 को इन्टेस्ट आफ एक्सप्रेशन और 8 सितम्बर को पूर्व बोली सम्मेलन आयोजित किया, लेकिन केवल एक आवेदक नहीं आने के कारण बोली रद्द कर दी गई। 2016 मई माह में फर्टिलाइजर चलाने की मंजूरी मिल गई और पीएम ने 22 जुलाई को शिलान्यास भी कर दिया। वर्तमान में भारत सरकार के अधीन एक नई कंपनी इस काम को अंजाम दे रही। फिलहाल पुरानी फैक्ट्री के कबाड़ को हटाने का काम चल रहा। 36 महीने में कारखाना के चालू किये जाने की बात भी चल रही।