सरकार का दावा अपराधी जमानत रद करा रहे, इस अपराधी ने जेल से भागने
गोरखपुर। एक तरफ योगी सरकार यह दावा कर रही है कि अपराधी अपनी जमानतें रद करवाकर जेल में ही रहना चाहते हैं तो दूसरी ओर रंगदारी के लिए कुख्यात चंदन सिंह जेल से भागने की कोशिश कर पुलिस की इकबाल को चुनौती देने के साथ सरकार के दावे पर सवाल खड़े कर रहा। बंदायूं जेल में अपने एक अन्य साथी के साथ जेल से भागने की कोशिश कर चुका चंदन गोरखपुर और आसपास क्षेत्रों में दहशत का पर्याय है। चंदन जेल के अंदर रहे या बाहर हमेशा पुलिस के लिए मुसीबत साबित रहा है। कई बार जेल और पुलिस के सामने से फरार हो चुका चंदन अपने आपराधिक कारनामों के लिए हमेशा ही सुर्खियां बटोरता रहा।
चलती ट्रेन से कूदकर फरार हो गया था चंदन
चिलुआताल थानाक्षेत्र के कुसहरा गांव का रहने वाला चंदन सिंह गांव में पोल गाड़ने के विवाद में हुई हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा पा चुका है। हत्या, रंगदारी और लूटपाट आदि के 40 से अधिक मामले विभिन्न जिलों में दर्ज है। आजमगढ़ में हुए एक लूट के मामले में वांछित चंदन को कुछ साल पहले भी पुलिस ने गिरफ्तार कर देवरिया जेल भेज दिया था। 12 अगस्त 2013 को देवरिया जेल से चंदन को दूसरे जिले में न्यायालय में पेशी पर ले जाया गया था। पुलिसकर्मी उसे न्यायालय में पेश कराने के बाद ट्रेन से लेकर लौट रहे थे। देवरिया के बैतालपुर स्टेशन के पास वह चलती ट्रेन से हथकड़ी पहने कूदकर फरार हो गया। इसके बाद वह लखनउ में अपना ठिकाना बना लिया था। वहीं के एक होटल से गिरोह संचालित करता था। रंगदारी और लूटपाट धड़ल्ले से करने लगा। लेकिन रंगदारी के एक मामले में 18 जुलाई 2014 को बाराबंकी पुलिस के हत्थे चढ़ गया। तब से जेल में रहा। बताया जाता है कि जेल में ही रहकर वह अपराध की दुनिया को संचालित कर रहा था। पुलिस सूत्रों की मानें तो चंदन जहां भी रहा अपना गैंग खड़ा कर लिया। यही वजह है कि लगातार उसके गिरोह के सदस्यों के पकड़े जाने के बाद भी वह जब भी जो चाहा करता रहा।
दो साल तक जेल में रहने के बाद मई 2016 में जेल में चंदन की तबीयत बिगड़ गई। उसे आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। 31 मई 2016 को पुलिस को चकमा देकर चंदन फरार हो गया। फरारी के दौरान चंदन की गतिविधियां बढ़ती चली गई। उसने फिरौती/रंगदारी के धंधे को और विस्तार देना शुरू कर दिया। गिरोह खड़े करने में माहिर चंदन ने नया गिरोह भी बना लिया। इस बीच उस पर 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित हो गया। इधर, चंदन को पकड़ने के लिए एसटीएफ ने जाल बिछाया। एसटीएफ ने 24 दिसम्बर 2016 को उसे गुजरात के अहमदाबाद से गिरफ्तार किया।
खौफ इतना कि इस जेल से उस जेल होता रहा ट्रांसफर
बारबार पुलिस अभिरक्षा से फरार होने और जेल में रहते हुए भी अपने रंगदारी के धन्धे को चलाने में सफल होने की वजह से चन्दन हमेशा ही पुलिस के लिए सिरदर्द बना रहा। आलम यह कि चंदन जेल में रहा हो या जेल के बाहर न तो कभी उसका खौफ कम हुआ न ही उसके रंगदारी मांगने के मामलों में कमी आई। पुलिस लगातार उसपे शिकंजा कसती गई लेकिन वह नित नए काट खोजता रहा। चंदन गिरोह को माफिया की सूची में डाला गया। एक-एक कर एक दर्जन से अधिक सदस्यों को गिरफ्तार किया लेकिन चंदन को रोकने में नाकाम रही। चंदन दो साल में बाराबंकी, लखनउ, बदायूं सहित कई जेलों में ट्रांसफर हो चुका है लेकिन लाख बंदिशों के बावजूद जेल से रंगदारी मांगने का सिलसिला जारी रहा।
पेशी पर आने पर अधिवक्ता की मोबाइल से मांगा करता था रंगदारी
पुलिस जितना चैकसी रखती चंदन उतना ही चालाकी दिखाता। जब जेल में उस पर शिकंजा कसा जाने लगा तो पेशी के दौरान अपने अधिवक्ता की मोबाइल का प्रयोग कर रंगदारी मांगने लगा। संतकबीनगर के रहने वाले अधिवक्ता पर यह भी आरोप है कि चंदन द्वारा मांगी गई रंगदारी की रकम को वह ठिकाने भी लगाता था।
पुलिस में भी हैं चंदन के मुखबीर
चंदन नाम का खौफ यूं ही हर ओर नहीं है। पुलिस रिपोर्ट्स के अनुसार चंदन ने पुलिस विभाग में भी अपने मुखबीर पाल रखे हैं। आरोप यह है कि गोरखपुर, बस्ती मंडल के जिलों सहित बनारस, आजमगढ़ आदि मंडलों में ढेर सारे वर्दीधारी ऐसे हैं जो चंदन के लिए ‘साफ्ट कार्नर’ रखते हैं। सूत्रों की मानें तो इस एवज में उनको चंदन कुछ रसूम अदा किया करता था। गोरखपुर के तत्कालीन एसएसपी आकाश कुलहरि ने इस बाबत एक गोपनीय रिपोर्ट भी शासन को भेजी थी। उन्होंने उस समय कुछ पुलिसवालों पर कार्रवाई भी की थी। विभागीय जांच भी बैठाई थी। हालांकि, उनके ट्रांसफर होने के बाद सबकुछ रफादफा हो गया।
गोलियों से छलनी कर दी थी बिहार के बीजेपी नेता की गाड़ी
माफिया चंदन सिंह पूर्वांचल का तेजी से उभरा अपराधी है। वह अपने दुस्साहसिक वारदातों की वजह से हमेशा से सुर्खियों में रहा। चलती ट्रेन से पुलिस को चकमा देकर फरार होने के बाद फरारी के दौरान चंदन ंिसह नेपाल, बिहार, गुजरात, लखनउ आदि जगहों को अपना ठिकाना बनाया। इसी दौरान उसे किसी शरणदाता ने बिहार के बीजेपी नेता कृश्णा शाही की हत्या की सुपारी दी। चंदन ने पूरी प्लानिंग के साथ शाही पर हमला किया। बताया जाता है कि चंदन ने अंधाधुंध करीब सौ राउंड गोलियां बरसाई। गाड़ी तो छलनी हो गई लेकिन शाही बच गए। इस दुस्साहस के बाद भी चंदन फरार हो गया। लेकिन पुलिस काफी सक्रिय हो गई और वह बाराबंकी से गिरफ्तार हो गया।