गोरखपुर

सूर्यदेव को अघ्र्य देने के साथ महापर्व छठ पूर्ण, माताआें ने अपने अपनों के लिए मांगी सुख-समृद्घि, दीर्घायु

CHHATH MAHAPARV
1 minute read
chhath
सूर्यदेव को अघ्र्य देने के साथ महापर्व छठ पूर्ण, माताआें ने अपने अपनों के लिए मांगी सुख-समृद्घि, दीर्घायु

भगवान भाष्कर के उगने पर अघ्र्य देने के बाद आस्था का महापर्व छठ बुधवार को पूर्ण हुआ। घाटों पर व्रती महिलाओं के साथ उनके परिजन की भारी भीड़ जुटी। शहर के विभिन्न काॅलोनियों में बने छठ घाटों, नदी-पोखरों पर देर रात से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। सुबह अघ्र्य देने तक नदी-पोखरों के घाटों पर लोग जमे रहे। व्रती महिलाओं ने अघ्र्य देकर अपने परिवार और बच्चों के यश-वैभव व दीर्घायु होने की कामना की।
बुधवार को करीब 6 बजकर 36 मिनट पर सूर्याेदय हुआ। सूर्यदेव को अघ्र्य देने के लिए घाटों पर देर रात से ही व्रती महिलाएं जुटी रही। कई घाटों पर जागरण का भी आयोजन किया गया। प्रशासन से लेकर स्वयंसेवी संस्थाएं घाटों पर इंतजाम में कई दिनों से लगे रहे। सूर्याेदय के कुछ देर पहले से ही महिलाएं अघ्र्य देने के लिए घाट के किनारे पहुंचने लगी। सूर्य देव के प्रकट होते ही अघ्र्य देने का सिलसिला शुरू हुआ।
ठंड में पानी में उतरकर निराजल व्रत रखी महिलाओं ने अपने-अपनों की सुख-समृद्धि की खातिर अघ्र्य देकर सूर्यदेव व छठ मईया की अर्चना की। करीब डेढ़ घंटे में अधिकतर छठ घाटों पर अघ्र्य देने का सिलसिला समाप्त हो गया। इसके बाद उनके साथ आए परिवारीजन ने अपनी माताओं-बहनों को पारण कराया। कुछ ने घाटों पर ही प्रसाद लेकर पारण कर लिया तो कुछ घर जाकर पारण की।
इस पर्व की अहम बात यह रहती है कि प्रशासन के अलावा खुद लोग ही घाटों की व्यवस्था में लगे रहते। हजारों की भीड़ होने के बावजूद बेहद व्यवस्थित तरीके से अघ्र्य पूर्ण करा लिया जाता है।
गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर, सूर्यकुंड, राप्ती नदी के तट के घाट, महेसरा घाट, विष्णु मंदिर, खरैया पोखरा, शाहपुर, बिछिया समेत शहर के करीब करीब प्रत्येक मोहल्ले में व्रतियों के लिए घाट बने थे। यहां महिलाओं ने सूर्यदेव को अघ्र्य देकर अपना व्रत पूर्ण किया।

Published on:
14 Nov 2018 03:19 pm