यूपी में खुल रहा शौचालय घोटाला, कागजों में हो रहे गांव ओडीएफ
पूरे देश को ओडीएफ कर दिया गया है जबकि असलियत में अभी तक कागजों में ही यह काम पूरा हो सका है। मुख्यमंत्री का जिला खुले में शौचमुक्त साल भर पहले हो चुका है लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। अभी तक हजारों लोग शौचालय बनवाने के लिए धन के लिए दौड़ रहे हैं तो कागजों में शौचालय बनवाकर लाखों शौचालयों का धन डकार तक लिया गया है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शौचालयों के निर्माण में लापरवाही व अनियमितता पर पंचायत सचिवों और सहायक विकास अधिकारियों के बाद अब प्रधानों को नोटिस किया गया है। 500 से अधिक शौचालयों के जियो टैगिंग नहीं करने वाले 35 गांवों के प्रधानों को नोटिस जारी हुआ है। डीएम के.विजयेंद्र पांडियान ने इनसे पंद्रह दिनों में स्पष्टीकरण मांगा है। इसी तरह सीडीओ ने करीब चार सौ प्रधानों व डीपीआरओ ने आठ सौ प्रधानों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
इन प्रधानों को डीएम ने जारी किया नोटिस, सीज होगा अधिकार
स्वच्छ भारत मिशन में अनियमितता पर डीएम ने जिन प्रधानों को नोटिस जारी किया है अगर वे पंद्रह दिन में जवाब नहीं देंगे तो उनके अधिकार सीज कर दिए जाएंगे। विभाग ने चरगांवा के बारह प्रधानों, जंगल कौड़िया, खजनी, खोराबार, पिपरौली, उरुवां, पिपरौली बांसगांव व भटहट ब्लॉक के एक, भरोहिया के पांच, ब्रह्मपुर के चार, पिपराइच व सहजनवां के दो तथा सरदारनगर ब्लॉक के तीन प्रधानों को नोटिस जारी किया है। इन लोगों ने शौचालयों के निर्माण में अनियमितता की है, जिया टैगिंग नहीं कराई है।
कर्मचारियों पर भी हो चुकी है कार्रवाई
शौचालयों के निर्माण अनियमितता पर इस महीना 269 सचिव और 20 सहायक विकास अधिकारियों का वेतन रोक दिया गया है।
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