गोरखपुर

गजब…हजारों परिवारों के पास शौचालय नहीं फिर भी सीएम का जिला हो गया घोषित

हाल-ए-स्वच्छ भारत अभियान
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Updated: 24 Nov 2018, 1:47 AM IST
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गजब...सीएम का जिला हो गया आेडीएफ घोषित आैर हजारों के पास शौचालय ही नहीं

आजादी के दीवानों की धरती चैरीचैरा क्षेत्र की रहने वाली बदरून के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च कर शौचालय बनवाने के लिए सरकारी मदद का ढ़िढोरा बेमानी लगती है। प्रधान व पंचायती राज विभाग के जिम्मेदारों के आश्वासन पर उन्होंने शौचालय तो बनवा लिया लेकिन छह माह से अधिक समय बीतने के बाद भी उनको सहायता राशि नहीं मिल सकी है। प्रधान के घर, ब्लाॅक मुख्यालय से लेकर जिला के अधिकारियों तक गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई लाभ नहीं मिल सका। सरकारी सहायता के नाम पर तो सिर्फ आश्वासन मिल रहा, उल्टे इस दौड़भाग में जो खर्च हुआ वह अलग।
बीजेपी सरकार स्वच्छता अभियान को जिस तरह से जन से जोड़ रही उससे मुख्यमंत्री के जिले के छितहरी के रहने वाले वाले रविंद्र इत्तफाक नहीं रखते। कई साल से एक अदद शौचालय के लिए वह गुहार लगा रहे। लेकिन उनको सफलता नहीं मिल सकी है। उनको उम्मीद है कि चुनाव आने वाला है, संभव है उनकी बात सुन ली जाए।
ये नाम एक बानगी भर है, ऐसे लोगों की एक लंबी फेहरिश्त है। स्वच्छता अभियान की यह विद्रुप तस्वीर सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के जिले की है। जिला गोरखपुर। अभी महीना ही बीता होगा जब अधिकारियों ने इस जिले को ओडीएफ होने का ऐलान करते हुए सीएम के हाथों इसका सर्टिफिकेट भी ले लिया। लेकिन सर्टिफिकेट लेने और कागजों में किसी जिले को संतृप्त करने के इतर हकीकत कुछ और ही है।
सर्टिफिकेट लेने में जल्दी करने वाले जिला गोरखपुर में अभी भी हजारों लोगों को शौचालय की दरकार है। यह क्षेत्र इन शौचालयों के अभाव में अभी भी खुले में शौच से मुक्त नहीं हो सका है। लोग शौचालय के लिए दफ्तरों की दौड़ लगा रहे लेकिन उनको सफलता नहीं मिल पा रही। यही नहीं जो लोग किसी तरह आश्वासन पर अपना शौचालय बनवा भी लिए हैं उनमें भी अधिकतर को सरकारी सहायता नहीं मिल सकी है और वे जिम्मेदारों के आफिस का चक्कर लगा रहे।
जबकि प्रशासन से लेकर शासन तक आंकड़ेबाजी में ही बाजीगरी दिखा रहा।
डीपीआरओ आफिस के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत पिछले पांच सालों में करीब 528 करोड़ रुपये शौचालय बनाने में खर्च हुए हैं। इस रकम से सवा पांच लाख से अधिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है। विभाग के अनुसार 638 करोड़ में जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय के निर्माण हो सकेगा। ऐसे में अभी भी 121 करोड़ रुपये की जरूरत है। उधर, विभागीय दावा यह है कि 121 करोड़ रुपये लोगों का विभाग पर बकाया है। ये वे लोग हैं जिन्होंने शौचालय बना लिए हैं लेकिन उनको धन नहीं मिल सका है।

जिला ओडीएफ और सरकारी आंकड़ों में 55 हजार को अभी भी दरकार

गोरखपुर यानि मुख्यमंत्री का जिला भले ही खुले में शौच से मुक्त हो चुका है। इसका सर्टिफिकेट भी प्रशासन मुख्यमंत्री के हाथों पा चुका है लेकिन हकीकत यह है कि केवल सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अभी भी 55 हजार घरों में शौचालय नहीं है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि बिना शौचालय के ये लोग खुले में नहीं जाते तो कहां जाते हैं।
विभाग इन परिवारों के बारे में यह बताता है कि ये वे लोग हैं जो 2012 में हुए सर्वे में छूट गए थे। कुछ ऐसे भी हैं जो बाद में परिवार की श्रेणी में आए।
अब जबकि सरकारी रिकार्ड में पचपन हजार से अधिक परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं। अगर गैर सरकारी रिकार्ड की मानें तो एक लाख से अधिक परिवारों को अभी भी शौचालय की आवश्यकता है। ऐसे में मुख्यमंत्री के जिले में ओडीएफ का हाल और मोदी की महत्वाकांक्षी योजना की दुर्गति को प्रदेशस्तर पर समझा जा सकता है।

साल-दर-साल बने शौचालयों की स्थिति

2014-15: 14382

2015-16: 17934

2016-17: 30716

2017-18: 265750

2018-19: 199077

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