गोरखपुर

UPSC जुनून एेसा कि अंकिता ने विदेश जाने का आॅफर त्यागा तो अंशु ने दो साल नौकरी कर तैयारी शुरू की

यूपीएससी परीक्षाः गोरखपुर के इन होनहारों ने साबित किया कि जुनून हो तो कोई लक्ष्य बड़ा नहीं

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गोरखपुर। सिविल सेवा में पूर्वांचल की दमदार उपस्थिति दर्ज हो रही है। गोरखपुर के दो होनहारों ने सिविल सेवा की परीक्षा पास कर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। गोरखपुर की बेटी अंकिता मिश्रा ने यूपीएससी में 105वां तो शहर के बिछिया काॅलोनी के रहने वाले अंशु कुमार ने 163वीं रैंक प्राप्त कर गौरवान्वित किया है।
शहर के तारामंडल क्षेत्र में रहने वाले व्यवसायी बीके मिश्र की बड़ी बिटिया अंकिता का सपना सिविल सेवा में जाने का रहा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाली अंकिता को यूपीएससी का जुनून ऐसा कि उन्होंने विदेश जाने का आॅफर तक ठुकरा दिया। गोरखपुर के हरपुर बुदहट क्षेत्र में रामनगर सूरस गांव के मूल निवासी बीके मिश्रा की तीन संतानों में अंकिता सबसे बड़ी हैं। अंकिता ने हाईस्कूल तक पढ़ाई शहर के एचपी चिल्ड्रेन स्कूल से की। इसके बाद दिल्ली का रूख कर लिया। इंटरमीडिएट की पढ़ाई डीपीएस नोएडा से करने के बाद अंकिता ने जेएसएस नोएडा से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
सिविल सेवा के प्रति अपनी जुनून के बारे में अंकिता बताती हैं कि पढ़ाई पूरी करने के बाद कैलिफोर्निया में पीजी की पढ़ाई का आॅफर मिला। इसके लिए फेलोशिप भी मिलनी थी लेकिन उन्होंने सिविल सेवा में जाने का मन बनाया। फिर पीजी की पढ़ाई का ख्याल त्याग कर इसी में रम गई। तीसरे प्रयास में यूपीएससी में 105वीं रैंक पाने वाली अंकिता को आईपीएस मिलेगा। वह आईएएस बनना चाहती हैं। अंकिता कहती हैं कि वह फिर प्रयास करेंगी। उन्होंने बताया कि सफलता के लिए अपने लक्ष्य पर फोकस करना चाहिए।

गोरखपुर के बिछिया काॅलोनी में रहने वाले रेलवे के अधिकारी प्रभुनाथ प्रसाद श्रीवास्तव के दूसरे नंबर के पुत्र अंशु कुमार श्रीवास्तव ने सिविल सेवा में सफलता प्राप्त कर ली है। सिविल सेवा की परीक्षा में 163वीं रैंक प्राप्त करने वाले अंशु आईआईटी से बीटेक हैं। इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी में जुटे अंशु की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा गोरखपुर में ही हुई है। दिल्ली आईआईटी से बीटेक करने के बाद 2012 में उन्होंने चेन्नई की एक कंपनी में नौकरी शुरू कर दी।लेकिन नौकरी में अधिक समय रम न सके और नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी में जुट गए। 2014 से तैयारी शुरू करने वाले अंशु ने तीसरे प्रयास में यह सफलता पाई है।

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Published on:
28 Apr 2018 03:02 pm
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