ग्रेटर नोएडा

बच्चे को उसकी आजादी की मिली ऐसी सजा कि हैरान रह गए सब

बच्चे के पिता के कहने पर मोलवी ने बच्चे को जंजीर से बांधकर रखा, शौच के बहाने मदरसे से फरार हो गया था बच्चा

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ग्रेटर नोएडा। बचपन में सभी शरारत करते हैं, लेकिन शायद ही किसी बच्चे को शरारतों की ऐसी सजा मिली होगी जैसी सजा यहां एक कस्बे में रहने वाले दस साल के तारिफ को मिली। उसकी आजादी को जंजीरों में जकड़कर रखा गया। आरोप है कि आजाद ख्याल तारिफ को पढ़ने में रुचि नहीं थी। उसे जब भी स्कूल में दाखिल कराया वह स्कूल से भाग जाता था।

लिहाजा परिवार वालों ने उसे एक मदरसे में दाखिल करा दिया। तारिफ को मदरसे में जंजीर से बांधकर रखा गया। हालांकि बीते गुरुवार यानी 17 जनवरी को बच्चा शौच के बहाने दीवार फांदकर फरार हो गया। काफी खोजबीन के बाद पता नहीं चला तो उसके परिजनों को सूचना दी गई। शनिवार सुबह वह मंगरौली के जंगल में मिला तो लोगों ने पुलिस को ख़बर दी। जिसके बाद पुलिस ने बच्चे को बरामद कर परिजनों को सौंप दिया। हालांकि इस मामले में पुलिस ने किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।

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पिता के कहने पर बांधा था जंजीर से
मदरसे के मौलवी अली मोहम्मद का कहना है कि बच्चे की शरारतों को देखते हुए पिता के कहने पर उसे जंजीर से बांधकर रखा गया था। लोहे की जंजीर में ताला डालकर उसका एक पैर बांध दिया था ताकि वह भाग ना सके। दो दिन पहले शौच के बहाने बच्चा मदरसे की दीवार फांदकर भाग गया।

पुलिस ने भी माना शरारती है बच्चा
उधर बच्चे की बरामदगी को लेकर जेवर के थाना प्रभारी राजपाल सिंह का कहना है कि जेवर की पीआरवी को गश्त के दौरान सूचना मिली की एक बच्चा मंगरौली के जंगल में अकेला पड़ा है। पीआरवी तारिफ को अपने साथ ले आई। बच्चा शरारती है पुलिस को गुमराह कर रहा था। ऐसा लगता है कि उसने खुद ड्रामा रचा। हालांकि उसे पकड़कर बाद में उसे परिजनों को सौंप दिया गया। इस मामले में पुलिस ने किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। उधर तारिफ के पिता अनवर ने भी स्वीकार किया कि तारिफ स्कूल से भाग जाता था। तब उसे पड़ोस के मदरसे में दाखिल कराया था। जहां से वह दो दिन पहले भाग गया था। खैर इस मामले में जो बात निकल कर सामने आई है वो ये है कि बच्चा शरारती हो सकता है, लेकिन सवाल है कि उससे जंजीरों में कैदकर उसके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करना कहा तक जायज है।

फिल्म 'तारे जमीन पर' बन सकती है प्रेरणा
गौरतलब है कि कुछ साल पहले सिनेमा जगत में ऐसी एक फिल्म 'तारे जमीन पर' आई थी जिसमें बच्चे का पढ़ने में बिल्कुल मन नहीं था और इसी को लेकर उसके माता-पिता ने उसे बोर्डिंग स्कूल में डाल दिया, लेकिन बच्चे की काबिलियत को उसके टीचर ने बखूबी पहचाना।

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Updated on:
21 Jan 2018 03:04 pm
Published on:
21 Jan 2018 01:21 pm
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