लखनऊ में एप्पल के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी को गोली मारकर हत्या करने का यह पहला मामला नहीं है। उत्तर प्रदेश पुलिस की गुंडागर्दी पहले भी सामने आती रही है।
नोएडा: लखनऊ में एप्पल के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी को गोली मारकर हत्या करने का यह पहला मामला नहीं है। उत्तर प्रदेश पुलिस की गुंडागर्दी पहले भी सामने आती रही है। गौतमबुद्धनगर में भी आमलोगों को पुलिस निशाना बना चुकी है। एक तरफ जहां नोएडा में जिम ट्रेनर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वहीं एक मामले में तीन निर्दोषों को जान गंवानी पड़ी थी। उनके डेडबॉडी भी आज तक परिजनों को नहीं मिली है। पुलिस ने तीनों को चोरी के आरोप में हिरासत में लिया था, लेकिन तीनों के बारे में आज तक कोई सुराग नहीं लगा है।
आरोपी तत्कालीन एसओ को कोर्ट बरी कर चुकी है। लेकिन उनके परिजन आज भी न्याय की तलाश में भटक रहे है। मामला 2004 का है। ग्रेटर नोएडा की कासना कोतवाली पुलिस ने 6 सितंबर 2004 को चोरी के आरोप में तीन नाबालिग को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। दरअसल में तीनों को गामा—1 सेक्टर में तैनात सिक्यूरिटी गार्डो ने तीनों को पुलिस को सौंपा था। गार्डो ने उनपर चोरी करने का आरोप लगाया था। अरशद, आसिफ और मेहरबान तीनों ही कबाड़ी का काम करते थे।
कासना पुलिस को सौंपने के बाद में ये तीनों ही तीनों ही रहस्यमय ढंग से गायब हो गए। परिजनों ने पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर हत्या करने का आरोप लगाया था। दादरी के नई बस्ती गांव के रहने वाले वाले परिजनों ने कासना के तत्कालीन एसओ समेत कई पुलिसकर्मियों पर हत्या का आरोप लगाते हुए मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी। मामला बढ़ता देख उस समय तत्कालीनन सरकार ने एसओ को सेवा से बर्खास्त कर दिया, जबकि कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। हत्या का कोई सबूत न मिलने पर बाद में कोर्ट ने एसओ व पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया। उन्हें वापस नौकरी भी पा ली।
इसके अलावा 4 फरवरी 2018 को पर्थला गोलचक्कर के पास एक ट्रेनी दरोगा ने मामूली विवाद पर पर्थला गांव के जिम ट्रेनर जितेंद्र यादव को गोली मार दी थी। लोगों के गुस्से को देखते हुए ट्रेनी दरोगा विजय दर्शन को सस्पेंड कर गिरफ्तार कर लिया गया। घटना की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है। जितेंद्र यादव घर में बिस्तर पर पड़े जीवन-मौत के बीच जूझ रहे हैं।