2014 में हुए लोकसभा और 2017 में यूपी में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान बसपा का जनाधार खत्म होता नजर आया था
ग्रेटर नोएडा. 2014 में हुए लोकसभा और 2017 में यूपी में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान बसपा का जनाधार खास नहीं रहा था। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में करारी हार बसपा को झेलनी पड़ी थी। तभी से बसपा सु्प्रीमो मायावती वोट बैंक को वापस पाने में जुटी हुई है। यहीं वजह है कि मायावती यूपी में कई लोकसभा सीट पर अपना प्रत्याशी लोकसभा चुनाव के लिए उतार चुकी है। वहीं दूसरी राज्यों में भी संभावना तलाश रही है।
रक्षाबंधन से पहले मायावती ने हरियाणा में इनेलो नेता अभय चौटाला को राखी बांधी थी। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के दौरान मायावती इनेलो के साथ में हरियाणा में गठबंधन कर सकती है। हालाकि इससे पहले भी मायावती हरियाणा में इनेलो से गठबंधन कर चुकी है। अब कर्नाटक में निकाय चुनाव जीतने के बाद में बसपा अपनी लय में आती हुई नजर आ रही है। कार्यकर्ता इससे लोकसभा के लिए अच्छे संकेत मान रहे है। दरअसल में कर्नाटक में हुए निकाय चुनाव में बसपा ने 13 सीट हासिल की है। बसपा नेता विजय पाल ने बताया कि जीत के बाद में कार्यकर्ताओं में खुशी है। लोकसभा चुनाव से पहले यह अच्छी खबर है। वहीं बसपा नेता व पूर्व मंत्री करतार सिंह नागर ने बताया कि यूपी के साथ-साथ बसपा अन्य राज्यों में जनधार जुटाएगी। जीत के बाद में एक तरफ जहां बसपाईयों में खुशी की लहर दौड़ गई है। वहीं उनके जिले में खुशी मनाई गई। गौतमबुद्धनगर का बादलपुर गांव मायावती का पैतृक गांव है।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बसपा ने जेडीएस के साथ गठबंधन किया था। विधानसभा में मायावती के खाते में एक सीट गई थी। हालाकि मायावती 175 सीटो पर चुनाव लड़ी थी। निकाय चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने 13 सीट हासिल की है। उधर कांग्रेस बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि बीजेपी दूसरे नंबर पर रही है। कर्नाटक निकाय चुनाव में मिली जीत को लोकसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है।