भाई ने बहन के लिए किया था त्याग तो बहन ने भी रक्षाबंधन से पहले दिया यह रिटर्न गिफ्ट
ग्रेटर नोएडा. इडोनेशिया के जकार्ता में चल रहे एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर दिव्या काकरान ने देश का नाम रोशन किया है। दिव्या ने रेसलिंग में सिल्वर मेडल हासिल किया है। इस मुकाम को हासिल करने के लिए परिवार का सहयोग और भाई की कुर्बानी अहम रही है। साथ ही उनकी खुद की मेहनत भी। परिजनों की माने तो दिव्या काफी मेहनती है और घंटो अखाड़े में पसीना बहाती है। दिव्या की तमन्ना आगे भी देश को मेडल दिलाना है।
दिव्या के पिता सूरज भी पहलवान रहे है। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद भी उन्होंने अपनों बच्चों को पहलवानी में आगे बढ़ाने की ठान ली। घर की माली हालत अच्छी न होने के वजह से दिव्या के पिता सूरज परिवार का पेट पालने के लिए दंगलों में लंगोट बेचते थे। उन्होंने पहले तो अपने बड़े बेटे देव को आगे बढ़ाने की ठान ली। साथ ही उसे दावपेच भी सीखाएं। लेकिन देव ने बहन दिव्या में खुद से बेहतर संभावनाएं देखीं तो उन्होंने पिता के साथ मिलकर आगे बढ़ाने की ठान ली। यहां तक की देव ने खुद की खुद की पढ़ाई और पहलवानी छोड़ दी। उसने ही दिव्या को स्कूल और अखाड़े तक लाने और ले जाने का कार्य करना शुरू कर दिया। उसका हर सम्भव सहयोग किया।
मूल रूप से मुजप्फरनगर के पुरबालियान गांव के रहने वाले दिव्या नोएडा कॉलेज आॅफ फिजिकल एजूकेशन में बीपीई थर्ड ईयर की स्टूडेंट है। स्कूल के चेयरमैन सुशील राजपूत ने बताया कि दिव्या काफी होनहार प्लेयर है। वह आगे भी देश का नाम नोशन करेंगी। उन्होंने बताया कि वह पढ़ाई में अच्छी है। उन्होंने बताया कि जकार्ता में उसने मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है। भव्यिय में उसकी हरसंभव मदद की जाएगी।
कुछ यू किया सफर तय
दिव्या के पिता सूरज ने बताया कि हरियाणा में लड़कियां खूब पहलवानी करती है। जबकि हरियाणा जैसे राज्यों में बेटियों को घर से बाहर भी नहीं निकलने दिया जाता है। उन्होंने बताया कि तभी से ही बेटी को पहलवानी की बारीकियां सीखाने की ठान ली थी। बेटा के साथ—साथ में बेटी को भी पहलवानी सिखानी शुरू कर दी। उनके आड़े तीनों बच्चों की पढ़ाई और पहलवानी का खर्च आ गया। दिव्या शुरू से ही बढ़िया खेल रही थी। लिहाजा उसे आगे बढाने का ठान लिया। लिहाजा बेटे देव ने भी पूरा साथ दिया। उन्होंने बताया कि वह दंगल में लड़कों को हरा देती है। उन्होंने बताया कि रेसलिंग कराने केे लिए मन नहीं किया करता था, लेकिन अखाड़े में उनके दंगल करने से घर का खर्च चलता था। हालाकि फिलहाल यूपी सरकार ने दिव्या को नौकरी और 20 लाख रुपये देने का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि यह सरकार की अच्छी पहल है।