
Child murder in guna: अपने सगे भाइयों और बुजुर्ग माता-पिता को जेल भिजवाने के लिए एक कलयुगी पिता ने क्रूरता की सारी हदें पार कर नदीं। पारिवारिक रंजिश और बदले की आग में अंधे शख्स ने किसी और को नहीं, बल्कि अपने ही ढाई साल के ने मासूम बेटे अनिरुद्ध को मौत के घाट ने उतार दिया।
दिल को झकझोर देने वाली यह वारदात जिले के कुंभराज थाना क्षेत्र की है। आरोपी पिता ने सोचा था कि वह कत्ल का इल्जाम अपने परिवार पर मढ़कर उन्हें हमेशा के लिए सलाखों के पीछे भेज देगा। हालांकि, पुलिस की सतर्कता , वैज्ञानिक जांच और सूझबूझ के आगे यह खौफनाक साजिश टिक नहीं सकी। पुलिस ने हत्यारे पिता को जेल भेज दिया है।
इस सनसनीखेज घटनाक्रम की शुरुआत 25 जून 2026 को हुई। कुंभराज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक ढाई वर्षीय मासूम बालक को मृत अवस्था में लाया गया था। अस्पताल प्रबंधन की सूचना मिलते ही कुंभराज थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पहली ही नजर में बच्चे की मौत बेहद संदिग्ध लग रही थी।
पुलिस ने बिना किसी देरी के मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी। इसके बाद जब मासूम की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई तो जांच अधिकारियों के भी होश उड़ गए। डॉक्टरों ने रिपोर्ट में साफ कर दिया कि बालक की मौत स्वाभाविक नहीं थी, बल्कि उसका गला दबाकर निर्मम हत्या की गई थी। इसके बाद पुलिस ने हर संदेहास्पद पहलू पर बेहद बारीकी से काम करना शुरू किया।
अंधी हत्या की गुत्थी सुलझने और जांच में पर्याप्त व अकाट्य साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने त्वरित कानूनी कार्रवाई की। कुंभराज थाना पुलिस ने आरोपी पिता मनोज (33) पुत्र रामविलास साहू, निवासी गीतानगर कॉलोनी, कुंभराज के विरुद्ध अपराध क्रमांक 103/26 के तहत बीएनएस की धारा 103(1) (हत्या) का प्रकरण पंजीबद्ध कर उसे विधिवत गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे जेल भेज दिया है।
मामले की तह तक जाने के लिए कुंभराज पुलिस ने मृत बालक के माता-पिता, भाइयों और अन्य करीबी रिश्तेदारों को थाने बुलाया। पुलिस ने सूझबूझ दिखाते हुए सभी को अलग-अलग कमरों में बिठाया। पृथक-पृथक पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान पुलिस नै एक महत्वपूर्ण सुराग पकड़ा। परिवार के बाकी सदस्यों के बयानों में तो समानता थी, लेकिन मृत बच्चे का पिता मनोज साहू बार बार अपनी बात बदल रहा था।
उसके बयानों में लगातार विरोधाभास सामने आ रहा था। पुलिस का संदेह गहराते ही मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया गया। जब वैज्ञानिक पद्धतियों और पुख्ता तथ्यात्मक साक्ष्यों के आधार पर उससे कड़ी पूछताछ की गई, तो वह टूट गया। मनोज साहू ज्यादा देर तक सच छिपा नहीं सका और पुलिस के सामने रोते हुए जुर्म कबूल कर लिया।
मनोज ने अपने ढाई साल के बेटे अनिरुद्ध की घर में ही गला दबाकर हत्या करना स्वीकारा है। वह ऐसा कृत्य कर अपने परिजनों को ही फंसाना चाहता था। इसके बाद वह उस बच्चे की लाश लेकर अपने भाइयों के मकान पर पहुंचा था। पत्नी के छोड़कर चले जाने के बाद वह मानसिक रूप से परेशान था। - पंकज त्यागी,टीआई कुंभराज