
Dharmendra Kushwaha Success Story: गेंदे की खेती कर शुरु किया बिजनेस (Photo Source - Patrika)
Success Story: कहते हैं जहां चाह वहां राह। एमपी में आरोन के किसान धर्मेंद्र कुशवाह ने इस कहावत को सच कर दिखाया। 10 साल पहले तक जो किसान सब्जी मंडी के भरोसे था, आज वो खुद का बाजार खड़ा कर सालाना 12 लाख का कारोबार कर रहा है। वो भी सिर्फ डेढ़ एकड़ जमीन से।
खास बात यह है कि धर्मेंद्र ने हार नहीं मानी, मुश्किल को मौका बनाया। धर्मेंद्र पहले सब्जियां उगाते थे। एक बार सीमित जमीन में फूल लगाए तो मुनाफा देखकर चौंक गए। तभी मन बना लिया कि अब फूल ही उगाएंगे। लेकिन सबसे बड़ी दीवार थी कि फूल बेचें कहां ? मंडियों में कोई खरीदार नहीं। ज्यादातर लोग यहीं हार मान लेते।
पर धर्मेंद्र ने ठान ली। बाजार नहीं है तो क्या, अपना बाजार बना लेंगे। आरोन में खुद की फूलों की दुकान खोल दी। सिर्फ फूल नहीं, बुके, वरमाला, शादी की सजावट -सब शुरू किया। आज हाल ये है कि फूल खेत से सीधे ग्राहक तक पहुंचते है। बिचौलिया कोई नहीं। कलेक्टर किशोर कन्याल धर्मेंद के खेत पर पहुंचे और तारीफ की। गुलाब की क्यारियां देखकर बोले नवाचार चाहिए।
आज डेढ़ एकड़ में कश्मीरी गुलाब, नवरंगा और गेंदा लहलहाते हैं। ड्रिप से पानी, जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट पूरी खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाती है। नतीजा ये है कि सालाना 12 लाख का कारोबार और 6 से 7 लाख रुपये घर आते हैं। धर्मेंद्र कहते है ये हार न मानने का ही नतीजा है।
धर्मेंद्र कहते हैं कि कामयाबी अकेले नहीं पचाई। फूल तोड़ने, छांटने, पैकिंग करने में गांव के 7 से 10 लोगों को रोजगार दे दिया। जो कभी मजदूरी के लिए बाहर जाते थे, अब गांव में ही काम मिल रहा है।
आज हाल ये है कि आसपास के किसान धर्मेंद्र से गेंदा-नवरंगा के पौधे खरीदते हैं। खेती कैसे करें, ये पूछने आते हैं। धर्मेंद्र सबको एक ही बात कहते हैं पारंपरिक खेती के साथ एक कोने में फूल लगा लो। कम जगह, ज्यादा पैसा। डरना नहीं है, करना है। समस्या का रोना मत रोओ, समाधान बनो। छोटी शुरुआत से डरो मत डेढ़ एकड़ काफी है, बस दिमाग चाहिए। सरकारी से मदद लो, पर भरोसे मत बैठो। धर्मेंद्र कुशवाह साबित करते हैं कि किसान का बेटा सिर्फ हल नहीं चला सकता, बिजनेस भी खड़ा कर सकता है। बस जरूरत है हिम्मत की, और उस एक कदम की जो भीड़ से अलग ले जाए।
Updated on:
28 Jun 2026 12:01 pm
Published on:
28 Jun 2026 12:01 pm
