Rajendra Shukla- किसानों को गुलाब की खेती करने की सलाह, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इसके फायदे गिनाए
Rajendra Shukla- मध्यप्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई जतन किए जा रहे हैं। इसके लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ ही प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार, पारंपरिक फसलों के स्थान पर नकदी फसलों, फूलों आदि की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए अनेक कार्यशालाएं और पुष्प प्रदर्शनियां भी लगाई जा रहीं हैं। गुना में ऐसी ही एक पुष्प प्रदर्शनी लगाई गई जिसके समापन कार्यक्रम में राज्य के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल Rajendra Shukla शामिल हुए। उन्होंने किसानों को गुलाब की खेती करने की सलाह दी। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इसके फायदे भी गिनाए। उन्होंने कहा कि इससे सालाना 14 लाख रुपए की कमाई हो सकती है।
गुना में संभागस्तरीय पुष्प प्रदर्शनी एवं कृषक कार्यशाला लगाई गई थी। मानस भवन में आयोजित समापन कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल सम्मिलित हुए। उन्होंने पुष्प प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने संभाग के विभिन्न जिलों से आए किसानों द्वारा लगाए गए स्टॉलों को देखा। उन्होंने किसानों से बात की और खेती की उन्नत तकनीकों की जानकारी ली।
खेती में रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते उपयोग पर डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत जताई। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि ऑर्गेनिक उत्पाद न केवल स्वाद और गुणवत्ता में बेहतर होते हैं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी सुरक्षित हैं।
पुष्प प्रदर्शनी में गुलाब की उन्नत एवं आकर्षक किस्में मुख्य आकर्षण रहीं। कार्यक्रम में ‘किंग ऑफ रोज’ का पुरस्कार अनिमेष श्रीवास्तव को उनकी ‘रिवाइवल’ किस्म के लिए प्रदान किया। गोपाल अग्रवाल को उनकी ‘टॉप सीक्रेट’ किस्म के लिए ‘क्वीन ऑफ रोज’ का पुरस्कार दिया गया।
प्रदेश के किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल Rajendra Shukla ने अहम सलाह दी। उन्होंने किसानों को गुलाब की खेती करने को कहा। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि गुलाब की खेती से एक एकड़ में सालाना करीब 14 लाख रुपए तक की आय संभव है। यह पारंपरिक फसलों की तुलना में कहीं अधिक है। मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि गुलाब की यह कहानी आने वाले समय में प्रदेश और देश के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बनेगी। यह मॉडल अन्य किसानों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।