MP News: इंदौर की 14 मौतों के बाद भी सबक नहीं। अब एमपी के इस शहर में सड़ी पाइपलाइन, खुले चैंबर और लीक लाइनों से घर-घर पहुंच रहा बीमारी वाला पानी। यहां देखें चौंका देने वाली रिपोर्ट।
Indore contaminated water case: इंदौर में दूषित पानी से हुई 14 मौतों ने पूरे प्रदेश को सन्न कर दिया है। लेकिन, क्या गुना ने इस त्रासदी से कोई सबक लिया? शहर की बदहाल जल सप्लाई व्यवस्था को देखकर ऐसा लगता है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। गुना की गलियों में बिछी जर्जर पाइपलाइनें और गंदगी से लबालब खुले चैबरों के बीच से गुजरती नल की लाइने सीधे तौर पर मौत को बुलावा दे रही है। शहर की ढाई लाख से अधिक आबादी को प्यास बुझाने के लिए 30 हजार नल कनेक्शनों, 400 ट्यूबवेल और सिंध नदी पर निर्भर रहना पड़ता है।
विडंबना देखिए, जिस पाइपलाइन के जरिए घरों और अस्पतालों तक पानी पहुंच रहा है, वह जगह-जगह से लीकेज है। इसी रिसाव के रास्ते कीचड़ और संक्रमण घरों की रसोई तक पहुंच रहा है। तस्वीरें डरावनी है और चेतावनी साफ है कि अगर जर्जर ढांचे को तुरंत दुरुस्त नहीं किया गया, तो संक्रमण का यह खतरा किसी भी दिन बेकाबू हो सकता है। (mp news)
नदी मोहल्ला, कोटेश्वर मंदिर (Koteshwar Temple) गली और आसपास के क्षेत्रों में घरों तक पानी पहुंचाने के लिए जो छोटी पाइप लाइनें बिछाई गई हैं, वह भी गंदे पानी और नालियों के बीच से गुजर रही हैं। यहां कभी भी लीक होने की स्थिति में दूषित पानी घरों तक पहुंच सकता है। इससे लोगों को भीषण बीमारियां हो सकती हैं लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
शहर के निचला बाजार, रपटे के पास से गुजर रही मेन पाइप लाइन पिछले 15 दिनों से फूटी पड़ी है। यहां से पानी लगातार बह रहा है और आसपास कचरे का ढेर जमा है। इसी लाइन से डेढ़ दर्जन से अधिक कॉलोनियों और मोहल्लों में जल सप्लाई होती है। सवाल यह है कि जब मुख्य लाइन ही असुरक्षित है. तो घरों तक पहुंचने वाला पानी कितना सुरक्षित होगा?
जल प्रकोष्ठ अधिकारी संचित डिमरी से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि हर दिन शिकायतें आती हैं और उन्हें ठीक कराया जाता है। हालांकि जब उनसे टूटी-फूटी और लीक पाइप लाइनों की जानकारी होने के सवाल पर पूछा गया तो जवाब मिला इस तरह की जानकारी नहीं है, दिखवाएंगे।
सबसे गंभीर स्थिति जिला अस्पताल की है। यहां 15 विंग और वाडाँ में जिस ट्यूबवेल से जल सप्लाई होती है। इस लाइन में लीकेज है जब ट्यूबवेल बंद होता है. तो सड़क पर जमा गंदा पानी वापस उसी में भर जाता है। जहां रोज सैकड़ों मरीज भर्ती होते हैं, वहां इस तरह की लापरवाही सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ है।
इंदौर की त्रासदी के बाद जब पत्रिका रिपोर्टर ने सुबह 6:45 से 9:25 बजे तक गुना की गलियों का जायजा लिया, तो सिस्टम की रूह कंपाने वाली लापरवाही सामने आई। कहीं कचरे के ढेरों के बीच पाइपलाइनें दबी हैं. तो कहीं गंदी नालियों और खुले वॉल्व से होकर संक्रमण घरों तक पहुंच रहा है। लीक होते चैंबर और बदबूदार रास्तों से गुजरती यह जल सप्लाई व्यवस्था चीख-चीखकर किसी बड़े खतरे का संकेत दे रही है। यदि प्रशासन अब भी नींद से नहीं जागा, तो शहर की सेहत कभी भी बेकाबू हो सकती है।
घोसीपुरा इलाके में एक जल सप्लाई वॉल्व बिना किसी चैंबर के खुला पड़ा है, जहां से हरिनंदन कॉलोनी, आजाद मोहल्ला और घोसीपुरा के करीब 400 घरों में पानी जाता है। कर्नलगंज रोड, हेड पोस्ट ऑफिस के सामने और ढोंगापुरा क्षेत्र में भी वॉल्य खुले पड़े हैं।
आंबेडकर चौराहा क्षेत्र में मेन पाइप लाइन का वॉल्व चैंबर के अंदर है. लेकिन जब अंदर झांककर देखा गया तो पूरा चैंबर पानी से भरा हुआ था। सप्लाई के समय पानी बाहर बहता है और शेष पानी वहीं जमा रह जाता है। (mp news)
पेयजल सप्लाई की सुचार के लिए हम लगातार प्रयास करा रहे हैं। यदि कहीं लाइन टूटी होगी तो उसको हम चेक करवाते हैं और उसको सुधरवाया जाएगा। शहर में फिलहाल कहीं भी दूषित पानी की शिकायत नहीं हैं। -मंजूषा खत्री, प्रभारी सीएमओ, नगर पालिका गुना