गुना

ईरान-अमेरिका तनाव से MP पर पड़ा असर, ड्राई फ्रूट्स के बढ़े दाम, केसर बना सोने से महंगा

MP News: कड़ाके की ठंड में राहत देने वाले ड्राय फ्रूट्स इस बार गुना के लोगों के लिए आफत बन गए हैं। अंतरराष्ट्रीय तनाव और टैरिफ की मार से केसर, पिस्ता और बादाम के दाम आसमान छू रहे हैं।

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Jan 15, 2026
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Iran-US Tension Hits Dry Fruits and Saffron Price rise (फोटो- AI)

Iran-US Tension: कड़ाके की ठंड के इस मौसम मैं जहां शरीर को गर्माहट और ऊर्जा देने के लिए सूखे मेवों (डाय फ्रूट्स) का सहारा लिया जाता है, वहीं इस बार इनकी कीमतों ने आम दमी के पसीने छुड़ा दिए हैं। गुना जिले के बाजारों में मेवों के दाम रॉकेट की रफ्तार से बढ़ यो हैं।

आलम यह है कि जिस तरह सोना और चांदी अपनी कीमतों से लोगों को चौकाते हैं, ठीक उसी तरह अब केसर, पिस्ता, बादाम और अंजीर के भाव सुनकर ग्राहकों की नींद उड़ गई है। पिछले दो महीनों के भीतर इन खाद्य पदार्थों की कीमतों में जो जबरदस्त उछाल (Dry Fruits Price)आया है, उसने न केवल आम जनता की रसोई का बजट बिगाड़ा है, बल्कि कारोबारियों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खीच दी हैं। (MP News)

केसर ने दिया सबसे बड़ा झटका

बाजार में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली तेजी केसर में देखी गई है। ईरान से आने वाले केसर की कीमतों (Saffron Prices) में प्रति किली करीब एक लाख रुपए तक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। डेढ़ माह पहले तक जो केसर जिस भाव पर था आज वह बाई लाख से पौने तीन लाख रुपए किलो के स्तर को छू रहा है। हालांकि औषधीय गुणों के कारण इसकी मांग तो बनी हुई है. लेकिन आसमान छूते दामों की वजह से खरीददारों की संख्या में भारी गिरावट आई है। पिस्ता भी पीछे नहीं है। जो पिस्ता पहले 1800 से 1900 रुपए किलो मिल रहा था, वह अब 2400 रुपए तक पहुंब गया है। यानी सीधे तौर पर 35 फीसदी की बढ़ोतरी।

यह है कारण, जिससे बदले समीकरण

चाजार विशेषज्ञों और स्थानीय व्यापारियों की मानें तो ड्राय फुट्स की कीमतों में लगी इस आग के पीछे घरेलू से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। वर्तमान में कई देशों के बीच बल रहा आपसी तनाव और सीमाओं पर सैन्य खींचतान ने 'सप्लाई चैन को बुरी तरह प्रभावित किया है। विशेष रूप से ईरान और अमेरिका से जुड़े व्यापारिक समीकरण बदल गए हैं। अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ नियमों और खाड़ी देशों में अस्थिरता के कारण आयात महंगा हो गया है। हालात इतने विकट हैं कि तुर्की से आने वाला 'गीला अंजीर तो अब स्थानीय बाजार से लगभग नदारद हो चुका है।

बाजार में कहां से क्या आता है

ईरान का केसर और पिस्ताः पिस्ता और केसर का मुख्य स्रोत ईरान है। वहां के हालात और परिवहन बाधाओं के कारण आपूर्ति उप जैसे है. जिससे ये सबसे महंगे बिक रहे हैं।

अफगानिस्तान का अंजीरः अंजीर का प्रमुख उत्पादन केंद्र अफगानिस्तान है। सीमाई विवादों और राजनीतिक अस्थिरता ने अंजीर की सप्लाई लाइन काट दी है. जिससे इसके दाम 25 से 30 फीसदी तक बढ़ गए हैं।

पाकिस्तान का छुआराः छुआरे की आवक पाकिस्तान से होती है। भारत पाक सीमाओं पर तनाव के चलते माल सीधे नहीं आ पा रहा है। चोरी-छिपे या घुमावदार रास्तों से माल पहुंबने से लागत 300 रु किलो तक पहुंगी है।

कैलिफोर्निया बादामः अमेरिकी बादाम पर राष्ट्रपति के टैरिफ फैसलों का साया है, जिससे बादाम की कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

क्या कह रहे हैं कारोबारी

ड्राय फ्रूट्स के बड़े कारोबारी बटी जैन बजते हैं कि अपने व्यापारिक जीवन में पिछले दो महीनों जैसी अप्रत्याशित तेजी कभी नहीं देखी। माल की कमी और ऊंची कीमतों ने ग्राहकों को पीछे धकेल दिया है। दुकानदार हुजैफा फारिग का कहना है कि लोग दुकान पर आते तो हैं, लेकिन केसर और पिस्ता के दाम सुनते ही बिना खरीदें लौट जाते हैं। वर्तमान में काजू 1000 रुपए मखाने 1300 रुपए और चिरौंजी 2200 रुपए किलो तक बिक रही है. जो आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही है।

टॉपिक एक्सपर्ट

करोड़ों का गणित व्यापार एवं उद्योग महासंघ के जिलाध्यक्ष राजेश अग्रवाल का कहना है कि जिले में द्वारा फूट्स का मासिक कारोबार लगभग 10 से 12 करोड़ रुपए के बीच होता है। जिले की 15 लाख आबादी में से करीब 5 फीसदी (75 हजार लोग) नियमित रूप से मेवे खाते हैं।

इस आधार पर केवल नियमित उपभोक्ता ही महीने में करीब 375 से 5.25 करोड़ रुपए के मेवे क्या जाते हैं।विवाह समारोहों और सामाजिक भोज में मेवी के उपयोग से हर महीने करीब 15 से 25 करोड़ रुपए का अतिरिक्त कारोबार होता है। सर्दी के कारण अतिरिक्त 7 फीसदी आबादी मेवों का रुख करती है, जिससे 2 से 5 करोड़ रुपए का व्यापार बढ़ जाता है। (MP News)

Published on:
15 Jan 2026 11:09 pm