गुना

नदी-तालाब अतिक्रमण की चपेट में कैसे होंगे स्मार्ट, हर जगह जलसंकट

नदी-तालाब अतिक्रमण की चपेट में कैसे होंगे स्मार्ट, हर जगह जलसंकट
2 min read
• •
Updated: 2 May 2018, 11:36 AM IST
water pollution, save water, water shortage, guna news, patrika bhopal, patrika news,

गुना. बीते दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुना को मिनी स्माार्ट सिटी बनाने की घोषणा की। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने 282 करोड़ रुपए की इस स्मार्ट सिटी का शुभारंभ किया। यहां होने वाले कामों के लिए डीपीआर भी बनकर भोपाल पहुंच गई है। अगले तीन महीने में मिनी स्मार्ट सिटी का काम भी शुरू हो जाएगा। लेकिन स्मार्ट सिटी में जिन नदियों और तालाबों को स्मार्ट बनाने के लिए चिन्हित किया है वह पूरी तरह से अतिक्रमण की चपेट में हैं।

नदियों और तालाबों के साथ-साथ जल स्त्रोतों पर भी दबंगों ने कब्जा कर लिया है, जिससे वे रिचार्ज नहीं हो पा रहे हैं। जबकि पानी बचाओ के लिए जिले भर मे जल संसद और जलाभिषेक अभियान चल रहे हैं। इस सबके बाद भी जिले में पेयजल व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। वहीं दूसरी ओर सिंध और चोपेट नदी पूरी तरह सूख गई है।

बारिश कम होने से इस भीषण गर्मी के मौसम में भूजल स्तर घटने से जिससे सैकड़ों की तादाद में नलकूपों और हैण्डप पों से पानी निकलना बंद सा हो गया है। एक सैकड़ा से अधिक नल-जल योजना बिजली के अभाव में दम तोड़ती नजर आ रही हैंं। कुल मिलाकर ये है कि शहर हो या गांव। पेयजल संकट दिनों-दिन गहराता जा रहा है। अब तो जानवरों तक को पीने के पानी का समुचित इंतजाम तक नहीं हो पा रहा है। जबकि देखा जाए तो इस गर्मी में 1० से 15 लाख लीटर से ज्यादा खपत एक दम बढ़ गई है। वर्तमान में सवा दो करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति हो रही है।

सिंध नदी: १५ किमी दूर सिंध नदी बसी हुई है। यहां नपा ने दो दशक पूर्व 72 करोड़ रुपए की लागत से एनीकट परियोजना बनाई थी। वर्तमान में सिंध नदी की ये स्थिति है कि बारिश कम होने से वहां पानी नाम-मात्र का रह गया है। शहर में हर दिन लगभग ४० लाख लीटर पानी पाइप लाइनों के जरिए सिंध नदी पर कराए गए दो दर्जन से अधिक ट्यूवबेलों से शहर में बनी टंकियों में आता है।

भुजरिया तालाब अतिक्रमण की चपेट में
सरकारी दस्तावेजों में भुजरिया तालाब 100 बीघा का है, लेकिन मौके पर अब मुश्किल से 50 बीघा बचा है। इस बचे हुए हिस्से में ही 17 पट्टे हैं, जो पिछले 60 साल से काबिज हैं। जबकि कुछ समय पूर्व एक व्यक्ति ने अपनी जमीन दान कर दी थी। जिसे मिलाकर 16 बीघा जमीन गहरीकरण के लिए उपलब्ध है। इस हिस्से में कुछ समय पूर्व गहरीकरण का काम भी हुआ था। लेकिन यह तालाब पूरी तरह से अतिक्रमण की चपेट में है, जिससे यह तालाब रिचार्ज नहीं हो पा रहा है।

गुनिया नदी
गुनिया नदी जहां से भी निकल रही है, वहां दबंगों ने कब्जे कर लिए हैं। स्टेशन रोड पर तो एक आलीशान होटल ने गुनिया नदी को सकरा कर दिया है। पूर्व में एनजीटी ने यहां सेे अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे, इसके बाद भी अतिक्रमण नहीं हटे।

सिंगवासा तालाब
सूत्रों ने बताया कि पूर्व में सिंगवासा तालाब काफी फैला हुआ था। यह तालाब भी दिनों-दिन अतिक्रमण से घिरता जा रहा है। सिंगवासा तालाब में पानी कम होता जा रहा है।

चोपेट नदी
रूठियाई स्थित चौपेट नदी जो सूख गई है उससे रूठियाई और राघौगढ़ में पानी की सप्लाई होती थी, सप्लाई भी प्रभावित होने लगी है।


ये है गोपाल पुरा तालाब की स्थिति
1972 में बना था तालाब।
1.19 मिलियन क्यूविक मीटर पानी भराव क्षमता।
6 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है तालाब का क्षेत्र।
11 मीटर तालाब की ऊंचाई।
140 हेक्टेयर भूमि में होती थी शुरुआती सालों में सिंचाई।
65 हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र ही शेष बचा है गोपालपुरा तालाब।

Published on: