MLA Fund: शिक्षक से विधायक बने पन्नालाल शाक्य का चौंकाता विकास मॉडल! ढाई करोड़ की विधायक निधि तो पूरी खर्च हो गई, लेकिन स्कूल, स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकार पर नहीं बल्कि इसमें….
MP News: राजनीति में अक्सर यह माना जाता है कि व्यक्ति जिस पृष्ठभूमि से आता है, उसकी झलक उसके निर्णयों में दिखाई देती है। लेकिन, गुना विधायक पन्नालाल शाक्य का 'रिपोर्ट कार्ड' (MLA Pannalal Shakya Report Card) इस धारणा के बिल्कुल उलट कहानी बयां कर रहा है। जीवन का लंबा समय शिक्षक के रूप में बिताने वाले विधायक शाक्य ने अपनी विकास निधि से 'शिक्षा' को ही पूरी तरह दरकिनार कर दिया है। 2025-26 के लिए आवंटित ढाई करोड़ रुपए की निधि में से उन्होंने अपने क्षेत्र के किसी भी स्कूल भवन या अतिरिक्त कक्ष के लिए एक ढेला तक खर्च नहीं किया।
विधायक पन्नालाल शाक्य जिले भर में अपनी निधि (MLA Fund) को शत-प्रतिशत खर्च करने वाले विधायकों की सूची में सबसे आगे रहे हैं। उनके पास वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आवंटित ढाई करोड़ रुपए की राशि का एक भी पैसा शेष नहीं रहा। उन्होंने निधि मिलते ही विकास कार्यों की ऐसी झड़ी लगाई कि योजना एवं सांख्यिकी विभाग को 356 करोड़ रुपए के कुल 28 अनुशंसित प्रस्ताव भेज दिए। इनमें से 19 कार्यों को स्वीकृति मिली, जिनकी कुल लागत ढाई करोड़ रुपए है।
हैरानी की बात यह कि इन 19 स्वीकृत कार्यों में एक भी कार्य शिक्षा, स्वास्थ्य या सामाजिक सरोकार से जुड़ा नहीं है। शहर के जाटपुरा और मातापुरा जैसे सरकारी स्कूलों में जहां छतें टपक रही है और बच्चों के लिए अतिरिक्त कमरों की सख्त जरूरत है, वहां पूर्व शिक्षक रहे विधायक की नजर नहीं पहुंची। यही हाल धार्मिक स्थलों का भी रहा, जहां संगीत सामग्री या सौदर्याकरण के लिए जनता मांग करती रही, लेकिन विधायक की कलम ने वहां भी कंजूसी बरती।
विधायक निधि के उपयोग के पैटर्न को देखें तो स्पष्ट होता है कि विधायक की पहली और आखिरी पसंद ग्रामीण क्षेत्रों में स्टॉप डेम, चेक डेम और सीसी रोड निर्माण रही है। इनमें भी कुछ खास ग्राम पंचायतों पर मेहरबानी साफ नजर आती है। विनायक खेड़ी, महूगढ़ा और भौरा जैसी पंचायतों को मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना के 15 करोड़ के अलावा विधायक निधि से भी भरपूर हिस्सा मिला।
अकेले महूगढ़ा में ही लाखों रुपए की लागत से अलग-अलग सीसी रोड स्वीकृत किए गए। इसके विपरीत, गेहूं खेड़ा, गोपालपुर टकटैया, बरखेड़ा खुर्द, खेजरा, करोद, कामखेड़ा और अमोदा जैसी पंचायतों के ग्रामीण रपटा और नाली निर्माण के लिए विधायक के चक्कर काटते रहे, लेकिन उन्हें विकास के नाम पर केवल आश्वासन मिला, राशि नहीं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी मूलभूत समस्याओं को नजरअंदाज कर सारा बजट कुछ चुनिंदा जगहों पर खपा दिया गया।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों ने इस कार्यशैली पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. पुष्पराग शर्मा का कहना है कि कोई भी जनप्रतिनिधि हो, उसकी प्राथमिकता में शिक्षा और स्वास्थ्य अनिवार्य रूप से होना चाहिए। बुनियादी निर्माण भी जरूरी है, लेकिन जब बजट का बड़ा हिस्सा केवल सीमेंट और कंक्रीट के कार्यों (सीसी रोड, डेम) में झोंक दिया जाए, तो इसके पीछे जनप्रतिनिधि या उनके प्रतिनिधियों के निजी स्वार्थ की आशंका प्रबल हो जाती है।