MP News: पुलिस चैकिंग के दौरान गुजरात के व्यापारी के पास मिले एक करोड़ रुपये में से 20 लाख रुपये लेकर पुलिसकर्मियों ने 80 लाख रुपये वापस देकर व्यापारी को बिना कार्रवाई के जाने दिया था।
MP News: मध्यप्रदेश के गुना जिले के चर्चित रूठियाई कैश कांड में नया मोड़ आ गया है। पुलिस हिरासत में प्रताड़ना और अवैध वसूली के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बड़ा आदेश जारी किया है। न्यायालय ने शासन की उस रिपोर्ट को स्वीकार किया है, जिसमें याचिकाकर्ता नीरज जादौन को टॉर्चर करने के आरोपों की जांच एडिशनल एसपी गुना को सौंपी है। साथ ही, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में शासन की ओर से कोई अनुचित कार्रवाई होती है, तो याचिकाकर्ता पुन: न्यायालय की शरण लेने के लिए स्वतंत्र है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सुरक्षित रखा गया फैसला सार्वजनिक करते हुए याचिका का निराकरण कर दिया है।
सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश शासन ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि नीरज जादौन द्वारा लगाए गए प्रताड़ना के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 'लिबर्टी' (स्वतंत्रता) दी है कि शासन के आश्वासनों के बावजूद यदि अधिकारियों द्वारा कोई दंडात्मक कार्रवाई या प्रताड़ना दोहराई जाती है, तो वह तत्काल दोषियों के विरुद्ध अवमानना और कार्रवाई के लिए कोर्ट आ सकता है।
प्रारंभिक सुनवाई में शासन की ओर से कहा गया था कि नीरज का कोई बयान दर्ज नहीं किया गया है और न ही इसकी आवश्यकता है। इस पर अधिवक्ता भदौरिया ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि शासन दोषी अधिकारियों को बचाने के लिए तथ्यों को छिपा रहा है। इसी के बाद कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट तलब की थी, जिसे 20 अप्रैल को पेश किया गया। फिलहाल, हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अब पूरा दारोमदार एडिशनल एसपी की जांच रिपोर्ट पर टिका है।
गुना निवासी नीरज जादौन ने अधिवक्ता अवधेश सिंह भदोरिया के माध्यम से याचिका दायर कर सनसनीखेज खुलासे किए थे। आरोप के मुताबिक, 19 मार्च 2026 को गुना पुलिस ने गुजरात के व्यापारियों की चैकिंग के दौरान एक करोड़ रुपए जब्त किए थे। याचिका में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने इसमें से 20 लाख रुपए स्वयं हड़प लिए और शेष 80 लाख रुपए लौटाकर व्यापारियों को बिना किसी कानूनी कार्रवाई के जाने दिया। जब मामला सुर्खियों में आया और जांच एसडीओपी करेरा को सौंपी गई, तब नीरज जादौन को जबरन 24 घंटे से अधिक समय तक अवैध हिरासत में रखकर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। याचिकाकर्ता का दावा है कि पुलिस ने दबाव डालकर अपने मनमाफिक बयान दर्ज कर लिए। नीरज ने मांग की थी कि उनका बयान कैमरे की निगरानी और अधिवक्ता की उपस्थिति में दर्ज किया जाए और प्रताड़ित करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।