
MP News: यदि किसान पारंपरिक खेती को बदलकर नई सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं तो खेती लाभ का धंधा बन सकती है। एमपी में गुना जिले के आरोन विकासखंड के तहत आने वाले ग्राम रूसल्ला की किसान पुष्पलता अहिरवार ने इसे सच कर दिखाया है। उन्होंने किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की 'आत्मा योजना' के तहत चिया सीड्स की नवाचारी खेती की। वे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरी हैं।
चिया सीड्स की खेती से जुड़ने से पहले पुष्पलता 8 बीघा में आमतौर पर सोयाबीन और मक्का जैसी फसलें उगाती थीं। रासायनिक खादों और महंगी कीटनाशक दवाओं के इस्तेमाल से लागत बढ़ रही थी। मिट्टी की सेहत, पर्यावरण को नुकसान हो रहा था। मुनाफा न के बराबर होने से वे परेशान थीं।
पुष्पलता की जिंदगी में मोड़ तब आया जब उनका संपर्क 'आत्मा' टीम के अधिकारियों से हुआ। कृषि उप संचालक संजीव कुमार शर्मा एवं विभाग के अन्य अधिकारियों ने औषधीय व उच्च मूल्य वाली चिया सीड्स की खेती की सलाह दी। योजना के तहत विभाग ने तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ रबी सीजन में एक एकड़ में बुवाई के लिए चिया सीड्स का बीज उपलब्ध कराया।
बीज दरः मात्र 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
सिंचाई: 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत
समयः फसल महज 110 दिन में पककर तैयार
कीटनाशकों से मुक्तिः रासायनिक दवाओं और भारी उर्वरकों का खर्च न के बराबर
कुल उत्पादनः 5.5 क्विंटल (प्रति एकड़)
बिक्री केंद्र: नीमच कृषि उपज मंडी (क्लस्टर के किसानों के साथ)
भावः 21,000 प्रति क्विंटल
प्राप्त राशि: 1,15,500 रुपए
लागतः 23,500 रुपए
मुनाफा: 92,000 रुपए
-चिया सीड्स (Chia Seeds) शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होती है। ये फाइबर, प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं। इन्हें पानी, दूध या दही में भिगोकर खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है, जिससे वजन कम करने में भी मदद मिलती है।
-चिया सीड्स के सेवन से पाचन शक्ति मजबूत हो जाती है।
-पानी में भीगने के बाद ये फूलकर जेल जैसे बन जाते हैं, जो देर तक भूख नहीं लगने देते और अतिरिक्त कैलोरी लेने से बचाते हैं। इनमें मौजूद उच्च फाइबर कब्ज, गैस और एसिडिटी की समस्या से राहत दिलाता है और पाचन को दुरुस्त करता है।
-चिया सीड ओमेगा-3 फैटी एसिड का बेहतरीन पौधे-आधारित स्रोत हैं, जो खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करके दिल की बीमारियों के खतरे को दूर करते हैं।
-ये बीज कार्बोहाइड्रेट के पाचन को धीमा कर देते हैं, जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता और टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों को फायदा मिलता है।