Weather News: दिन और रात का तापमान बढ़ता जा रहा है, जो आगामी समय में जिलेवासियों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन सकता है। अप्रैल का औसत अधिकतम तापमान 39 डिग्री जबकि न्यूनतम 22 डिग्री है।
Weather News: मध्य प्रदेश के गुना में बढ़ता तापमान सारे रिकॉर्ड तोड़ रहा है। मौसम विभाग के आंकड़े इस ओर काफी समय से इशारा कर रहे हैं लेकिन अभी तक शासन-प्रशासन से लेकर जिलेवासियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया है। यही वजह है कि बढ़ते तापमान के असर के चलते जिले में भू-जल स्तर भी लगातार गिर रहा है। समय से पहले ज्यादा गर्मी और उसकी तीव्रता बढ़ गई है। इसे इस बात से समझा जा सकता है कि अप्रेल का औसत अधिकतम तापमान 39 डिग्री जबकि न्यूनतम 22 डिग्री है। लेकिन पिछले 5 दिन से दिन का पारा 40 प्लस चल रहा है।
इस दौरान तीन दिन ऐसे भी आए जब गुना का तापमान ग्वालियर और शिवपुरी जिले से भी ज्यादा रहा। इसलिए जरूरी है गुना के तापमान की तुलना ग्वालियर और शिवपुरी से मौसम विभाग के जानकारों के मुताबिक गुना का बढ़ता तापमान कई मायनों में चिंता का कारण है। इसकी तुलना ग्वालियर और पड़ौसी जिले शिवपुरी से भी इसलिए की जा रही है, क्योंकि ग्वालियर पथरीला इलाका है। जिसका तापमान आमतौर में शिवपुरी और गुना से हमेशा अधिक रहता था। लेकिन इस समय गुना गर्मी के मामले में इन्हें पीछे छोड़ चुका है। यहां तक कि हाल ही में तीन दिन गुना प्रदेश के टॉप-4 ऐसे जिलों में शामिल रहा, जिसका तापमान ज्यादा था।
पर्यावरणविद्ध डॉ पुष्पराग शर्मा ने पत्रिका को बताया कि गुना के बढ़ते तापमान की मुय वजह जंगलों की अंधाधुंध कटाई है। विकास के नाम पर सैकड़ों पेड़ काट दिए लेकिन उतनी संया में लगाए नहीं। वर्तमान में जिस जगह कलेक्टोरेट है, वहां एक समय बहुत घना जंगल हुआ करता था। गुना शहर में ही जंगल बहुत था, इसे कॉलोनियों के नाम से समझा जा सकता है। जैसे गोविंद गार्डन, लूसन का बगीचा, हरि सिंह बगिया, मर्दन सिंह बाड़ा आदि। इसके अलावा राघौगढ़, बमोरी और आरोन के रास्ते में भी बहुत घने जंगल थे। वहीं गुना शहर के प्राकृतिक जल स्रोत इनमें तीन नदियां गुनिया, ओढ़िया और पनरिया तथा तालाबों में भुजरिया और सिंगवासा और गोपालपुरा की उपेक्षा की जा रही है। बारिश के पानी को रोकने के लिए बहाव क्षेत्र में स्टॉप डैम बनाने की जरूरत है। वहीं तालाबों के सौन्दर्याकरण से ज्यादा गहरीकरण की आवश्यकता है।
बढ़ते तापमान के असर की बात करें तो इसका सबसे ज्यादा प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा। कृषि कल्याण विभाग के उपसंचालक अशोक उपाध्याय ने बताया कि सबसे पहले तो भूजलस्तर गिरने से पानी की कमी आएगी। वहीं दूसरी ओर फसलों को और ज्यादा पानी की जरूरत होगी। यही नहीं फसलों की पैदावार भी घट जाएगी।
6 अप्रैल को गुना में अधिकतम तापमान 41.0 डिग्री और न्यूनतम तापमान 21.0 डिग्री दर्ज किया गया। इसके बाद 7 अप्रैल को तापमान बढ़कर 43.0 डिग्री हो गया, जबकि न्यूनतम 22.8 डिग्री रहा। 8 अप्रैल को जिले में सबसे अधिक 43.4 डिग्री तापमान दर्ज हुआ और न्यूनतम 24.9 डिग्री रहा। 9 अप्रैल को 42.3 डिग्री अधिकतम और 25.4 डिग्री न्यूनतम तापमान दर्ज हुआ। वहीं 10 अप्रैल को अधिकतम तापमान 42.0 डिग्री और न्यूनतम 24.7 डिग्री रहा। 11 अप्रैल को तापमान 40.7 डिग्री तक दर्ज हुआ और रात का तापमान 23.5 डिग्री रहा।
बीते एक दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल महीने में तापमान में निरंतर वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2014 में अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री और न्यूनतम 18.6 डिग्री रहा। 2015 में अधिकतम 42.9 और न्यूनतम 17.0 डिग्री, 2016 में 42.9 और 18.8 डिग्री, 2017 में 43.6 और 17.4 डिग्री, 2018 में 43.6 और 20.5 डिग्री, 2019 में 44.4 और 14.8 डिग्री, 2020 में 41.4 और 18.4 डिग्री, 2021 में 43.4 और 18.5 डिग्री, 2022 में 44.5 और 20.4 डिग्री तथा 2023 में अधिकतम 41.0 और न्यूनतम तापमान 16.5 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। 18 अप्रैल 2010 को गुना का अब तक का सबसे अधिक तापमान 45.8 डिग्री दर्ज हुआ था, जबकि न्यूनतम तापमान 10.5 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।