भाजपा के विधायक रितुपर्ण बरुवा का कहना था कि अधिकांश गैर सरकारी संगठनों में अनियमितताएं हैं...
(पत्रिका ब्यूरो,गुवाहाटी): असम से बच्चों के लापता होने के आंकड़े से चिंताजनक स्थिति उभर रही है। खुद राज्य सरकार ने सोमवार को सदन में यह बात स्वीकारी। भाजपा के विधायक डॉ. नुमल मोमिन के प्रश्नोत्तरकाल में पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री के गृह और राजनीतिक विभाग की ओर से राज्य के संसदीय मंत्री चंद्रमोहन पटवारी ने बताया कि पिछले पांच सालों में 8443 बच्चे राज्य से लापता हुए हैं।
चौंका रहे आंकडें
उनके दिए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2013 में 1620, वर्ष 2014 में 1577, वर्ष 2015 में 1674, वर्ष 2016 में 1733 और वर्ष 2017 में 1839 बच्चे लापता हुए हैं। लापता होने की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। पटवारी ने आगे बताया कि 4377 लापता बच्चे पिछले पांच सालों में बरामद भी किए हैं। वर्ष 2013 में 688, वर्ष 2014 में 791, वर्ष 2015 में 911, वर्ष 2016 में 901 और वर्ष 2017 में 1086 बच्चे बरामद किये गये हैं।
गठित हुई कई कमेटियां
लापता बच्चों के बरामद होने के बाद उनके पुनर्वास के लिए जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट 2015 के तहत राज्य के सभी जिलों में शिशु कल्याण कमेटियां (सीडब्ल्यूसी) का गठन किया गया है। कानून के प्रावधानों के अनुसार बरामद बच्चों को पुलिस द्वारा सीडब्ल्यूसी के सामने पेश किया जाता है। सीडब्ल्यूसी बच्चों को पंजीकृत चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशनों में दीर्घकालिक और अल्प कालिक अवधि के लिए भेजती है। फिलहाल असम में 122 चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन हैं। इसके सरकार द्वारा दस संचालित होते हैं, वहीं 112 गैर सरकारी संगठनों द्वारा संचालित होते हैं।
गैर सरकारी संगठनों में अनियमितताएं
विधायक मोमिन ने मंत्री के जवाब पर कहा कि अधिकांश बच्चों को बरामद नहीं किया जा सकता है। एआईयूडीएफ के विधायक मामुन इमदादुल हक चौधरी ने कहा कि एंटी ह्यूमन ट्रॉफिकिंग सेल सही ढंग से काम नहीं कर रही है। भाजपा के विधायक रितुपर्ण बरुवा का कहना था कि अधिकांश गैर सरकारी संगठनों में अनियमितताएं हैं । इन्हें देखे जाने की जरुरत है ।