
Gwalior Summer Solstice - कुदरत के कैलेंडर में 21 जून कोई आम तारीख नहीं है। यह वह दिन है, जब आसमान में सूरज सबसे ज्यादा वक्त तक अपनी चमक बिखेरेगा। भारत सहित पूरे उत्तरी गोलार्ध में 21 जून को साल का सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होने जा रही है। इस दिन ग्वालियर में सूरज पूरे 13.43 घंटों तक तपेगा। इसके ठीक विपरीत, 21 दिसंबर को साल का सबसे छोटा दिन और सबसे बड़ी रात होती है। डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार खगोल विज्ञान और भारतीय ज्योतिष, दोनों ही लिहाज से यह घटना बेहद खास है। विज्ञान की भाषा में इसे 'ग्रीष्म अयनांश' (समर सॉल्सटिस) Summer Solstice कहा जाता है।
खगोल विज्ञान के साथ ही भारतीय ज्योतिष विज्ञान में इस दिन का बड़ा महत्व है। आध्यात्मिक और सांस्कृतिक नजरिए से यह अहम दिन है। इसे देवताओं की रात और वर्षा ऋतु के आगमन के रूप में जाना जाता है।
अब तक सूर्य देवता उत्तर दिशा (उत्तरायण) की तरफ बढ़ रहे थे, लेकिन 21 जून को सूर्य का सायन कर्क राशि में प्रवेश होगा। इसके साथ ही सूर्य की चाल दक्षिणायन की ओर हो जाएगी। इस बदलाव के बाद से दिन धीरे- धीरे छोटे और रातें बड़ी होने लगेंगी।
शास्त्रों के अनुसार, मकर से कर्क राशि तक का सूर्य का सफर (6 महीने) उत्तरायण यानी देवताओं का दिन कहलाता है। याद करिए महाभारत का वह प्रसंग, जब भीष्म पितामह ने इच्छा मृत्यु के लिए इसी पवित्र उत्तरायण काल का इंतजार किया था। वहीं, कर्क से मकर राशि तक का समय (6 महीने) दक्षिणायन कहलाता है, जिसे देवताओं की रात माना जाता है। दक्षिणायन के इस प्रवेश द्वार के साथ ही देश में वर्षा ऋतु का भी विधिवत प्रारंभ हो जाता है, जो तपती गर्मी से राहत लेकर आती है।
खगोलविज्ञानियों के मुताबिक हमारी पृथ्वी अपनी धुरी पर करीब 23.5 डिग्री झुकी हुई है। जून के महीने में पृथ्वी की स्थिति सूर्य के सामने कुछ ऐसी होती है कि उत्तरी गोलार्ध सूर्य की तरफ सबसे ज्यादा झुका रहता है। नतीजा भारत सहित इस हिस्से के तमाम देशों पर सूरज की किरणें सबसे ज्यादा समय तक पड़ती हैं। यही वजह है कि दिन लंबा और रातें छोटी हो जाती हैं।
21 जून को भारत के अलग- अलग शहरों में दिन की लंबाई कुछ इस तरह होगी :
ग्वालियर: 13 घंटे 43 मिनट
दिल्ली: 13 घंटे 55 मिनट
उज्जैन: 13 घंटे 30 मिनट