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5 हजार कर्मचारियों-अधिकारियों को हटाया, MP में सबसे बड़ी प्रशासनिक सर्जरी

MP Transfer News- प्रदेश में 1 जून से तबादले की प्रक्रिया शुरू हुई, आवेदन के लिए प्लेटफार्म विकसित करने में विभागों ने देरी की, आवेदक कर्मचारी, अधिकारी जिलों में चक्कर काटते रहे

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MP Transfer

MP Transfer: मध्य प्रदेश में ट्रांसफर (फोटो सोर्स: पत्रिका)

Transfer- मध्यप्रदेश में सबसे बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की गई है। इसके अंतर्गत प्रदेशभर के हजारों कर्मचारियों, अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है। सीएम डॉ. मोहन यादव द्वारा कैबिनेट की बैठक में तबादलों की मियाद 16 जून की रात 12 बजे तक बढ़ाने का ऐलान किया गया था। इसके बाद दोपहर से रात 12 बजे तक थोकबंद तबादले हुए। बताया जा रहा है कि करीब 5 हजार सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इससे पहले सोमवार रात भी राज्य सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की तबादला सूची जारी की थी।

कई विभागों में मंत्रियों के अनुमोदन के बावजूद आदेश जारी नहीं हुए

प्रदेश में असल में तबादलों की तारीख 15 जून की रात 12 बजे खत्म हो गई थी। लेकिन कई विभागों में मंत्रियों के अनुमोदन के बावजूद आदेश जारी नहीं हुए। ऐसा सोमवार रात 8 बजे के बाद ई- ऑफिस व दूसरे ऑनलाइन माध्यमों पर बढ़े दबाव और तकनीकी कारणों के चलते हुआ।

सीएम ने समय 16 जून की रात 12 बजे तक बढ़ाने का ऐलान कर दिया

कैबिनेट बैठक में मंगलवार को सीएम के सामने यह मुद्दा उठा। जिस पर सीएम ने समय 16 जून की रात 12 बजे तक बढ़ाने का ऐलान कर दिया। शाम होते होते सामान्य प्रशासन विभाग GAD ने आदेश भी जारी कर दिए।

मुख्यमंत्री की सहमति मिलते ही विभागीय अधिकारी सक्रिय , 5 हजार तबादले हुए

कैबिनेट में मुख्यमंत्री की सहमति मिलने की सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारी सक्रिय हो उठे। दोपहर के बाद रात 12 बजे तक करीब 5 हजार शासकीय सेवकों के तबादले हुए। इनमें ज्यादातर स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य, फूड, वन जैसे विभागों के थे।

रात 2 बजे राज्य प्रशासनिक सेवा के 155 अफसरों का तबादला

मोहन सरकार ने सोमवार रात 2 बजे राज्य प्रशासनिक सेवा के 56 एडीएम का तबादला किया। इन्हें बीते वर्ष ही पदोन्नति दे दी गई थी, लेकिन वरिष्ठ पदों पर पदस्थ नहीं किया था। राज्य प्रशासनिक सेवा के इन अधिकारियों की सूची लंबे समय से अटकी थी। वहीं डिप्टी कलेक्टर समेत 99 अन्य अधिकारियों के भी तबादले किए गए। इधर उधर किए गए सभी अधिकारी राज्य प्रशासनिक सेवा के ही हैं।

बता दें कि प्रदेश में 1 जून से तबादले की प्रक्रिया शुरू हुई थी। सीएम और मुख्य सचिव ने इसके लिए संबंधित मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दे दिए थे पर उनकी लाख कोशिशों के बावजूद कई विभागों ने तबादलों के आवेदन के लिए प्लेटफार्म ही विकसित नहीं किए। अधिकांश विभागों ने देरी की। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिले के चलते मंत्री- विधायक 5 जून से ही भोपाल में थे। मंत्री भोपाल में डटे रहे और आवेदक कर्मचारी, अधिकारी जिलों में चक्कर काटते रहे।